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राष्ट्रपति भवन में विकसित होगा ‘इंडियन हर्बल हेरिटेज गार्डन’? छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुर्मू को दिया प्रस्ताव

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनजातीय चिकित्सा परंपराओं और औषधीय वनस्पतियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के दौरान आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन परिसर में ‘इंडियन हर्बल हेरिटेज गार्डन’ विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध औषधीय वनस्पति संपदा, जनजातीय चिकित्सा पद्धतियों और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित कर व्यापक पहचान दिलाना है।

राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान रायपुर स्थित लोकभवन में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की। इस अवसर पर जनजातीय स्वास्थ्य परंपराओं के संरक्षण, औषधीय पौधों के संवर्धन और आदिवासी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई।

पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को सहेजने की पहल

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि आदिवासी समाज में पीढ़ियों से प्रचलित स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय वनस्पतियों से जुड़ा ज्ञान भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए वैद्यों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण, पंजीयन और प्रमाणन जैसी प्रक्रियाओं पर काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही औषधीय पौधों के महत्व के प्रति आम लोगों को जागरूक करने और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी जानकारी को संरक्षित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य जनजातीय समाज के पारंपरिक ज्ञान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

लखपति योजना से आदिवासी किसानों को मिल रहा आर्थिक संबल

राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे आदिवासी किसानों ने लखपति योजना से मिले लाभों और अपनी आय में आए बदलावों के अनुभव साझा किए। किसानों ने बताया कि आजीविका के अवसर बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इस तरह की पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

आदिवासी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और औषधीय पौधों के संवर्धन से ग्रामीण आजीविका के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

राष्ट्रपति भवन परिसर में दिखेगी भारत की औषधीय विरासत!

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के माध्यम से राष्ट्रपति भवन परिसर में ‘इंडियन हर्बल हेरिटेज गार्डन’ स्थापित करने का सुझाव दिया। प्रस्तावित उद्यान में भारत की विविध औषधीय वनस्पतियों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान को प्रदर्शित करने की परिकल्पना है।

यदि यह प्रस्ताव साकार होता है, तो देश की समृद्ध जैव विविधता और प्रकृति आधारित पारंपरिक चिकित्सा परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और औषधीय पौधों के महत्व को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

प्रस्ताव पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और इसे भविष्य में साकार करने की दिशा में आश्वासन दिया। हालांकि, उद्यान की स्थापना को लेकर अभी तक कोई निश्चित समयसीमा या विस्तृत कार्ययोजना सामने नहीं आई है।

विकास मरकाम के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिला प्रतिनिधिमंडल

राष्ट्रपति से हुई इस मुलाकात में बोर्ड अध्यक्ष विकास मरकाम के नेतृत्व में धमतरी जिला पंचायत सदस्य एवं प्रगतिशील कृषक अजय कुमार ध्रुव, वैद्यराज दशरथ नेताम, वैद्यराज जानकी प्रसाद पुलस्त्य, वैद्यराज रामलाल कुंजाम, कृषक लकेश नेताम और सामाजिक कार्यकर्ता आशू पोडेटी शामिल रहे।

इस पहल से जनजातीय समाज के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने, औषधीय पौधों के संवर्धन और आदिवासी किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने के प्रयासों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अब सबकी नजर इस प्रस्ताव पर आगे होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।

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