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मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा, 126 सुनवाइयों के बाद आया फैसला

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Meerut Blue Drum Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ की हत्या और उनके शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने के कारण यह मामला देशभर में सुर्खियों में रहा था। दोनों को 30 सितंबर 2026 को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। 14 अक्टूबर को अदालत ने सजा का ऐलान किया। <Cite refs={[“turn472954news24″,”turn472954news30”]}/>

कोर्ट में दिनभर चली सजा पर सुनवाई

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभतम श्रेणी का मामला बताते हुए मृत्युदंड की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने कम सजा देने की अपील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों दोषियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सौरभ के परिवार के सदस्य भी फैसले के दौरान अदालत में मौजूद रहे। <Cite refs={[“turn472954news24″,”turn472954news27”]}/>

126 सुनवाइयां और 22 गवाह, फिर आया फैसला

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। मुकदमे के दौरान करीब 126 सुनवाइयां हुईं। अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, तकनीकी तथ्यों और अन्य सबूतों पर विचार करने के बाद दोनों को दोषी ठहराया था।

30 सितंबर को दोषसिद्धि के बाद अदालत ने सजा पर फैसला सुरक्षित रखा था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा सुनाई गई। <Cite refs={[“turn472954search0″,”turn472954search3″,”turn472954search6”]}/>

क्या था नीला ड्रम हत्याकांड?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 को मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या की गई थी। जांच में आरोप सामने आया कि उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने खाने में नशीला पदार्थ मिलाया, जिसके बाद साहिल शुक्ला भी घटनास्थल पर पहुंचा। अभियोजन के मुताबिक, दोनों ने मिलकर सौरभ की हत्या की और बाद में शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में छिपा दिया।

ड्रम में सीमेंट और रेत का इस्तेमाल कर शव को छिपाने की कोशिश की गई थी। इसी वजह से यह मामला ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हुआ।

हत्या के बाद हिमाचल प्रदेश गए थे आरोपी

जांच एजेंसियों के अनुसार, वारदात के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश गए थे। पुलिस ने घटनाक्रम, मोबाइल फोन से जुड़े तथ्यों और अन्य साक्ष्यों की जांच की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में इन्हीं परिस्थितिजन्य और तकनीकी साक्ष्यों की कड़ी पेश की।

मामले में दुकानदारों की गवाही और अन्य भौतिक साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया। अदालत ने पूरे मुकदमे के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद दोनों को दोषी ठहराया। <Cite refs={[“turn472954search3″,”turn472954search8”]}/>

17 मार्च 2025 को सामने आया था मामला

सौरभ राजपूत के लापता होने को लेकर परिजनों को संदेह हुआ। 17 मार्च 2025 को घर में नीले ड्रम से शव के अवशेष मिलने के बाद मामला सामने आया और पुलिस जांच शुरू हुई। इसके बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया।

नीले ड्रम में शव छिपाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अब अदालत द्वारा दोनों को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।

अदालत के फैसले पर टिकीं निगाहें

मेरठ के इस हत्याकांड में अदालत का फैसला मामले की गंभीरता और अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आया है। मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित अपील से जुड़ी जानकारी भी महत्वपूर्ण रहेगी।

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