SIR Controversy: मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर विवाद के बीच 2,000 से ज्यादा नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों को खुला पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में SIR की वैधता और प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा पूरी होने तक इसे रोकने तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की गई है।
पत्र में मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म और सॉफ्टवेयर में कथित बदलावों की जांच, ECINET के सुरक्षा और कानूनी ऑडिट तथा चुनाव आयोग के अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा जैसी मांगें भी शामिल हैं। पत्र पर शिक्षाविदों, वकीलों, पूर्व अधिकारियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों समेत 2,000 से ज्यादा लोगों के हस्ताक्षर बताए गए हैं।
इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद 9 फैसलों की घोषणा की। आयोग ने कहा कि आगे होने वाली बैठकों का एजेंडा पहले साझा किया जाएगा और बैठक के बाद मिनट्स जारी किए जाएंगे। नए IT मॉड्यूल और पोर्टल लागू करने से पहले उनकी समीक्षा की जाएगी तथा ECINET की भी स्वतंत्र विशेषज्ञ की भागीदारी वाली समिति से समीक्षा कराई जाएगी।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताया है। आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित आदेशों को सभी तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। दूसरी ओर, The Indian Express की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की थी।
आयोग ने इन आपत्तियों को लेकर कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र किसी SIR नीति से संबंधित नहीं थे, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के काम से जुड़े थे। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी के कार्य-पुनर्वितरण के आदेश वास्तव में लागू नहीं हुए थे।
ECINET की होगी समीक्षा
चुनाव आयोग के अनुसार, ECINET की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी। इसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। समिति यह देखेगी कि सिस्टम चुनावी कानून और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
आयोग ने यह भी कहा है कि भविष्य में नए IT मॉड्यूल और पोर्टल शुरू करने से पहले उन्हें संबंधित अधिकारियों की समिति के सामने रखा जाएगा।
Form-6 और मतदाता सूची पर भी सवाल
SIR विवाद में Form-6 भी चर्चा के केंद्र में है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए इस्तेमाल होता है। रिपोर्टों में आयोग के भीतर इस फॉर्म में किए गए बदलावों को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई थी।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR में जिन पात्र लोगों के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित Electoral Registration Officer यानी ERO के पास Form-6 के जरिए नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। गोवा के मामले में आयोग ने बताया कि 97 ऐसे मतदाताओं में से 81 ने Form-6 भर दिया है।
वहीं, Form-6 में माता-पिता से जुड़ी जानकारी क्यों जोड़ी गई, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े अपील मामलों की प्रक्रिया क्या रही और गोवा में कुछ मतदाताओं के नाम बहाल करने वाले सॉफ्टवेयर फीचर को लेकर क्या स्थिति है—इन मुद्दों पर अभी भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
यानी फिलहाल SIR को लेकर एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग वाला खुला पत्र सामने आया है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया और IT सिस्टम को लेकर कई नए प्रशासनिक कदम घोषित किए हैं। आगे इस मामले में न्यायिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रम महत्वपूर्ण रहेंगे।