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सरपंच चुनाव में हार का बदला लेने के लिए हत्या! ₹1.20 लाख की सुपारी, मुंगेली पुलिस ने 5 आरोपियों को पकड़ा

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मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में सरपंच चुनाव में मिली हार की रंजिश के चलते तुलसी साहू की हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश कथित तौर पर ₹1.20 लाख की सुपारी देकर रची गई थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया गया।

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने पहले तुलसी साहू का अपहरण किया और फिर एक पंप हाउस में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को झाड़ियों में फेंककर वारदात के सबूत मिटाने की कोशिश की गई।

चुनाव में कुछ वोटों से हार बना रंजिश का कारण

पुलिस के मुताबिक, सरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम पेण्ड्री ‘स’ निवासी धनीराम साहू ने वर्ष 2025 में सरपंच पद का चुनाव लड़ा था। चुनाव में उसे करीब 8 से 9 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

मृतक तुलसी साहू चुनाव के दौरान मतगणना अभिकर्ता के रूप में काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि धनीराम को संदेह था कि तुलसी साहू ने जानबूझकर कुछ वोट निरस्त करवाए थे, जिसके कारण उसे चुनाव में हार मिली। पुलिस के अनुसार, इसी संदेह ने रंजिश का रूप ले लिया और तुलसी साहू की हत्या की साजिश रची गई।

₹1.20 लाख में तय हुई थी हत्या की सुपारी

पुलिस की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि मुख्य आरोपी धनीराम साहू ने ओमनारायण राजपूत के माध्यम से हत्या की सुपारी तय की थी। इसके लिए कुल ₹1 लाख 20 हजार देने की बात हुई थी।

आरोपियों को मृतक की पहचान, उसके घर और आने-जाने के रास्तों से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस के मुताबिक, सुपारी की रकम में से ₹70 हजार अग्रिम दिए गए थे। शेष रकम से जुड़े मामले में आरोपियों की निशानदेही पर ₹10 हजार बरामद किए गए हैं।

अपहरण के बाद पंप हाउस में वारदात

पुलिस के अनुसार, 25 अक्टूबर 2026 की शाम तुलसी साहू मोटरसाइकिल से घर से निकला था। रास्ते में आरोपियों ने उसे कथित तौर पर रोककर जबरन कार में बैठा लिया और सरगांव के पास स्थित एक पंप हाउस ले गए।

जांच में आरोप है कि वहां तुलसी साहू के हाथ-पैर बांधकर गला घोंट दिया गया। हत्या के बाद शव को मोटरसाइकिल से ले जाकर सड़क किनारे कीचड़ और झाड़ियों में फेंक दिया गया, ताकि वारदात का पता लगाने में पुलिस को परेशानी हो।

सबूत छिपाने और मिटाने की भी कोशिश

पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद आरोपियों ने साक्ष्य छिपाने के लिए कई कदम उठाए। मृतक के जूते, जैकेट और मोबाइल चार्जर को पंप हाउस के पास स्थित पोल्ट्री फार्म के पीछे छिपाया गया, जबकि मोबाइल फोन को घटनास्थल से दूर फेंक दिया गया।

जांच में मृतक का गमछा जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा, चुनाव में कथित गड़बड़ी स्वीकार करने से संबंधित शपथ पत्र तैयार कराने और हत्या से पहले मृतक का वीडियो बनाने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर खुला मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के मार्गदर्शन में साइबर सेल और सरगांव पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच की।

जांच के दौरान मृतक की मोटरसाइकिल घर से करीब दो किलोमीटर दूर मिली, जबकि शव मोटरसाइकिल मिलने के स्थान से लगभग 700 मीटर दूर बरामद हुआ था। पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, मृतक की आवाजाही और संदिग्धों से जुड़े तकनीकी व परिस्थितिजन्य तथ्यों का विश्लेषण किया। इसी जांच के आधार पर कथित हत्या की साजिश का खुलासा हुआ।

पुलिस ने पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने निम्नलिखित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है:

  1. धनीराम साहू (40 वर्ष)
  2. भुवन साहू (28 वर्ष)
  3. ओमनारायण राजपूत (25 वर्ष)
  4. सुरेंद्र जोशी (25 वर्ष)
  5. टीकाराम साहू (53 वर्ष)

पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर पंप हाउस के कटे तार, मृतक के जूते, जैकेट, मोबाइल चार्जर, मोबाइल फोन, स्टाम्प पेपर, घटना से संबंधित वीडियो, मोटरसाइकिल, निशान कार और ₹10 हजार की रकम सहित विभिन्न वस्तुएं जब्त करने की जानकारी दी है।

पुलिस के मुताबिक, सभी पांच आरोपियों को 30 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश किया गया। मामले में अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने जांच टीम की सराहना की

हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सरगांव पुलिस और साइबर सेल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। एसएसपी भोजराम पटेल ने जांच टीम के कार्य की सराहना की। वहीं, पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने मामले के खुलासे में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

इस मामले ने पंचायत चुनाव से जुड़ी कथित राजनीतिक रंजिश के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है। हालांकि, गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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