रायपुर – शाश्वत हिंदू जागृत की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक का आयोजन 2 एवं 3 अक्टूबर 2026 को रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन मंदिर परिसर में किया गया। बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। दो दिवसीय बैठक में संगठनात्मक गतिविधियों, सामाजिक सरोकारों, युवा सहभागिता तथा भारतीय सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े विषयों के साथ-साथ विभिन्न देशों में हुए जेन-जी आंदोलनों के संदर्भ में सामाजिक परिवर्तनों और उनसे जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक के प्रथम दिन 2 अक्टूबर को कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे उपस्थित रहीं। उन्होंने आयोजन में शामिल पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से संवाद किया।

संगठनात्मक विस्तार और सामाजिक सहभागिता पर चर्चा
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान संगठन की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं की सहभागिता बढ़ाने तथा सामाजिक विषयों पर जागरूकता एवं सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन की प्रभावशीलता उसके कार्यकर्ताओं की सक्रिय सहभागिता, अनुशासन, आपसी समन्वय और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना से मजबूत होती है। इस दिशा में संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

सनातन परंपरा, सामाजिक एकता और युवा पीढ़ी पर विचार
राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के अंतिम दिन 3 अक्टूबर को संगठन के मार्गदर्शकों द्वारा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को विभिन्न विषयों पर संबोधित किया गया। इस अवसर पर श्री महावीर प्रसाद हिंदू, न्यायमूर्ति श्री शम्भूनाथ श्रीवास्तव एवं श्री वासवराज पाटिल ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने संगठन को मजबूत बनाने, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों तथा समाज में सकारात्मक सहभागिता बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।
हिंदू धर्म और सनातन परंपरा के विभिन्न आयामों पर महावीर प्रसाद हिंदू ने रखे विचार
संगठन के मार्गदर्शक श्री महावीर प्रसाद हिंदू ने अपने उद्बोधन में हिंदू धर्म की अवधारणा एवं उसके विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार रखा। उन्होंने सनातन धर्म की परंपराओं, मान्यताओं एवं जीवन-पद्धति से जुड़े विभिन्न पक्षों पर चर्चा करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में अनेक ऐसी मान्यताएं और व्यवहार हैं, जिनके पीछे उनके अनुसार वैज्ञानिक एवं तार्किक आधार भी देखे जा सकते हैं। उन्होंने सनातन परंपराओं के संरक्षण एवं उनके प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को समझने के साथ-साथ उनके सकारात्मक पक्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। श्री हिंदू ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि देशहित में कार्य करते समय प्रांतीय और जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक सामाजिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने समाज में आपसी सहयोग, समन्वय और एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कर्मयोग के माध्यम से युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने पर जोर
न्यायमूर्ति श्री शम्भूनाथ श्रीवास्तव ने कर्तव्य, कर्म और सामाजिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कर्मयोग की अवधारणा के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, जिम्मेदारी और समाज के प्रति योगदान की भावना विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग रचनात्मक एवं समाजोपयोगी कार्यों में करना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत कर्तव्यों के साथ सामाजिक दायित्वों के संतुलन को भी महत्वपूर्ण बताया।
देश और समाज के प्रति दायित्व निभाने का आह्वान
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री डॉ. विवेक कुमार ने अपने संबोधन में वर्तमान समय में देश के समक्ष मौजूद विभिन्न चुनौतियों और बदलते सामाजिक परिवेश पर विचार रखा। उन्होंने कहा कि देश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्वों का ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने युवाओं और कार्यकर्ताओं से सकारात्मक सोच, सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने बदलते वैश्विक एवं सामाजिक परिवेश को समझते हुए समाज में जागरूकता, संवाद और रचनात्मक सहभागिता को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
सामाजिक, आर्थिक चुनौतियों और बदलते सामाजिक परिवेश पर विमर्श
श्री वासवराज पाटिल ने अपने संबोधन में देश के समक्ष मौजूद विभिन्न सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों तथा बदलते सामाजिक परिवेश पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद और जागरूकता आवश्यक है। उन्होंने विकास और आधुनिकता के साथ सांस्कृतिक मूल्यों एवं सामाजिक परंपराओं के संरक्षण के बीच संतुलन की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी युवाओं को बदलते सामाजिक परिवेश को समझते हुए उचित मार्गदर्शन और सकारात्मक अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने विभिन्न देशों में युवा आंदोलनों के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक बदलाव के दौर में युवाओं के साथ संवाद और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सनातन परंपराओं एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ते हुए युवा पीढ़ी की रचनात्मक सहभागिता बढ़ाने तथा समाज को सकारात्मक दिशा में आगे ले जाने पर जोर दिया।
युवाओं को शिक्षा, सामाजिक सेवा और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर बल
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि युवा पीढ़ी को केवल विचारों तक सीमित न रखते हुए उन्हें शिक्षा, सामाजिक सेवा, सांस्कृतिक गतिविधियों, राष्ट्र निर्माण और समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ा जाए। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा का सकारात्मक उपयोग समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में संगठन के आगामी कार्यक्रमों, कार्ययोजना तथा विभिन्न क्षेत्रों में गतिविधियों के विस्तार को लेकर भी पदाधिकारियों के बीच विचार-विमर्श हुआ।
संगठनात्मक समन्वय के साथ आगामी कार्ययोजना पर जोर
दो दिवसीय बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों की गतिविधियों एवं अनुभवों को साझा किया। संगठनात्मक स्तर पर आपसी समन्वय बढ़ाने, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर संचालित करने तथा युवा सहभागिता को प्रोत्साहित करने से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दो दिवसीय बैठक के समापन अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने संगठन के उद्देश्यों के अनुरूप सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।