संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का सत्र उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भाषण देने के लिए मंच पर पहुंचे। गाजा संघर्ष और इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही भारी तनाव बना हुआ है।
ऐसे में नेतन्याहू के संबोधन से ठीक पहले फिलिस्तीनी मिशन की अपील पर कई देशों के प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से वॉकआउट किया। अपने भाषण के दौरान नेतन्याहू ने तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया और इजरायल के रुख को बेहद आक्रामक अंदाज में रखा।
नेतन्याहू के मंच पर आते ही शुरू हुआ भारी वॉकआउट और विरोध
जैसे ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पहुंचे, हॉल में विरोध और समर्थन की मिली-जुली आवाजें गूंज उठीं। कुछ जगहों से तालियां तो कई हिस्सों से भारी हूटिंग और विरोध सुनाई दिया। महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान को बार-बार सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए कहना पड़ा।
फिलिस्तीनी मिशन ने पहले ही यूएन के 193 सदस्य देशों से अपील की थी कि वे नेतन्याहू के बोलते ही हॉल से बाहर निकल जाएं, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कोई भी देश गाजा में कथित नरसंहार में भागीदार नहीं बनना चाहता। वॉकआउट करने वाले इन प्रतिनिधियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने उन्हें ‘नैतिक कायर’ तक कह डाला।
गाजा में नरसंहार के आरोपों को बताया ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने गाजा में इजरायल पर लग रहे नरसंहार के सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि इजरायल के खिलाफ लगाए जा रहे ये आरोप झूठे ही नहीं, बल्कि ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ हैं।
उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमलों का जिक्र करते हुए इसकी तुलना अमेरिका के 9/11 हमलों से की और कहा कि इजरायल की कार्रवाई पूरी तरह से आत्मरक्षा के दायरे में है और उनका निशाना केवल हमास है।
ईरान पर हमले को बताया आसान और हिजबुल्लाह हमलों का जिक्र
ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि ईरान पर हमला करने का फैसला उनके अब तक के सबसे आसान फैसलों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि इजरायल जब अपनी रक्षा करता है, तब वह अप्रत्यक्ष रूप से कई अन्य देशों की भी रक्षा कर रहा होता है।
इसके अलावा उन्होंने अपने भाषण के दौरान एक पेजर भी हाथ में उठाया, जिससे उन्होंने 17 सितंबर 2024 को लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ किए गए उस चर्चित साइबर-हम्ले की याद दिलाई जिसमें हजारों पेजर में विस्फोट किए गए थे।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और स्थानीय स्तर पर गिरफ्तारी की मांग
नेतन्याहू के इस अमेरिकी दौरे का स्थानीय स्तर पर भी कड़ा विरोध देखने को मिला। न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने नेतन्याहू को ‘युद्ध अपराधी’ करार दिया और उनकी गिरफ्तारी की मांग उठाई।
हालांकि स्थानीय प्रशासन के पास अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के वारंट को सीधे लागू करने का अधिकार नहीं है, फिर भी अमेरिकी संघीय अधिकारियों से कार्रवाई का आग्रह किया गया। दूसरी ओर, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने भी अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीनियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की पुरजोर अपील की है।