धनतेरस पर सोना खरीदने की परंपरा अब डिजिटल निवेश के नए विकल्प से जुड़ रही है। अब निवेशकों के पास सोने के सिक्के और आभूषण खरीदकर घर या बैंक लॉकर में रखने के अलावा डिजिटल रूप में सोने का स्वामित्व हासिल करने का विकल्प भी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का Electronic Gold Receipts (EGR) प्लेटफॉर्म इसी दिशा में एक नई व्यवस्था लेकर आया है। इसके जरिए निवेशक अपने डीमैट अकाउंट में वास्तविक सोने से जुड़ी यूनिट रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत भौतिक सोना भी प्राप्त कर सकते हैं।
भारत में सोना केवल निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि परंपरा और पारिवारिक बचत का भी अहम हिस्सा है। धनतेरस, दीपावली और शादी-ब्याह जैसे अवसरों पर सोने की खरीदारी बढ़ जाती है। हालांकि, सोना खरीदने के बाद उसकी सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है। घर में रखने पर चोरी का डर और बैंक लॉकर के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में NSE का EGR प्लेटफॉर्म निवेशकों को सोने का डिजिटल स्वामित्व रखने का एक विकल्प देता है।
NSE ने कब शुरू किया Electronic Gold Receipts प्लेटफॉर्म?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने मई 2026 में Electronic Gold Receipts सेगमेंट की शुरुआत की थी। एक्सचेंज के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 18 मई 2026 से इसमें लाइव ट्रेडिंग शुरू हुई।
इस पहल का उद्देश्य सोने की खरीद-बिक्री को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। इसके माध्यम से निवेशक शेयर बाजार की तरह एक्सचेंज पर सोने से जुड़े उत्पादों का कारोबार कर सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि EGR कोई सामान्य डिजिटल गोल्ड ऐप नहीं है। यह SEBI के नियामकीय ढांचे के तहत आने वाली एक्सचेंज ट्रेडेड सिक्योरिटी है। इसके पीछे वास्तविक सोना पंजीकृत वॉल्ट मैनेजर के सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। यानी निवेशक के पास केवल डिजिटल आंकड़ा नहीं, बल्कि सुरक्षित वॉल्ट में रखे भौतिक सोने से जुड़ा स्वामित्व होता है।
क्या होता है Electronic Gold Receipts यानी EGR?
आसान भाषा में समझें तो Electronic Gold Receipts सोने की डिजिटल रसीद है। यह रसीद निवेशक के स्वामित्व वाले वास्तविक सोने का प्रतिनिधित्व करती है।
इस व्यवस्था में सोना SEBI के नियमों के तहत पंजीकृत वॉल्ट मैनेजर के सुरक्षित वॉल्ट में जमा रहता है। इसके बाद जमा सोने के अनुरूप EGR यूनिट निवेशक के डीमैट अकाउंट में क्रेडिट की जाती हैं।
जिस तरह शेयर बाजार में शेयर खरीदने के बाद वे डीमैट खाते में दिखाई देते हैं, उसी तरह EGR खरीदने पर सोने का स्वामित्व भी डीमैट खाते में दर्ज होता है। निवेशक पंजीकृत ब्रोकर के माध्यम से इन यूनिट की खरीद-बिक्री कर सकते हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को अपने पास भौतिक सोना रखने या उसकी सुरक्षा की अलग व्यवस्था करने की जरूरत नहीं पड़ती।
कितनी मात्रा और शुद्धता में खरीद सकते हैं सोना?
NSE के EGR प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग मात्रा और शुद्धता वाले उत्पाद उपलब्ध हैं। इनमें 995 और 999 शुद्धता वाले सोने के विकल्प शामिल हैं।
उपलब्ध उत्पादों में 10 मिलीग्राम, 1 ग्राम, 10 ग्राम, 100 ग्राम और 1 किलोग्राम जैसी मात्राएं शामिल हैं। हालांकि, प्रत्येक उत्पाद के लिए खरीदारी और भौतिक निकासी की न्यूनतम मात्रा अलग हो सकती है।
इस व्यवस्था से छोटे निवेशकों को कम मात्रा में सोने का स्वामित्व हासिल करने का विकल्प मिलता है। वहीं, ज्वैलर्स और बड़े कारोबारियों के लिए अधिक मात्रा वाले उत्पाद भी उपलब्ध हैं।
EGR में निवेश कैसे करें?
अगर आप Electronic Gold Receipts खरीदना चाहते हैं, तो इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी है। इसके बाद EGR सेगमेंट में कारोबार की सुविधा देने वाले पंजीकृत ब्रोकर के माध्यम से निवेश किया जा सकता है।
निवेश की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- सबसे पहले डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाएं।
- EGR सेगमेंट में कारोबार करने वाले पंजीकृत ब्रोकर से संपर्क करें।
- उपलब्ध उत्पादों की कीमत, मात्रा और शुद्धता की जानकारी लें।
- अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी का ऑर्डर दें।
- सौदा पूरा होने पर संबंधित EGR यूनिट आपके डीमैट अकाउंट में जमा हो जाएंगी।
इसके बाद निवेशक अपने डीमैट खाते में EGR होल्डिंग देख सकता है और एक्सचेंज के नियमों के अनुसार जरूरत पड़ने पर इन्हें बेच भी सकता है।
हालांकि, निवेश से पहले ब्रोकरेज, टैक्स, अन्य शुल्क और भौतिक डिलीवरी से जुड़ी शर्तों को समझना जरूरी है।
T+1 सेटलमेंट क्या है?
NSE के EGR सेगमेंट में T+1 सेटलमेंट व्यवस्था लागू है। इसका मतलब है कि कारोबार का निपटान सामान्य तौर पर अगले कारोबारी दिन पूरा होता है।
उदाहरण के लिए, यदि निवेशक सोमवार को EGR खरीदता है, तो सामान्य स्थिति में मंगलवार को सेटलमेंट पूरा होगा। इस प्रक्रिया में खरीदार और विक्रेता के बीच भुगतान और EGR यूनिट का हस्तांतरण निर्धारित नियमों के अनुसार होता है।
हालांकि, एक्सचेंज की छुट्टियों और तय कारोबारी कैलेंडर के कारण सेटलमेंट की तारीख में बदलाव हो सकता है।
जरूरत पड़ने पर डिजिटल सोने को भौतिक सोने में बदल सकते हैं
EGR की एक अहम विशेषता यह है कि निवेशक निर्धारित प्रक्रिया के तहत वास्तविक सोना भी प्राप्त कर सकता है। इसके लिए संबंधित वॉल्ट मैनेजर की शर्तों और निकासी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
निवेशक के पास संबंधित उत्पाद के अनुसार निर्धारित न्यूनतम डिलीवरी यूनिट होनी चाहिए। इसके बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी करके वॉल्ट से भौतिक सोना प्राप्त किया जा सकता है।
हालांकि, हर छोटी EGR यूनिट को अपनी पसंद के वजन के आभूषण में बदलने की सुविधा नहीं होती। भौतिक सोने की निकासी के लिए न्यूनतम मात्रा, शुल्क और अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं। इसलिए निवेश करने से पहले डिलीवरी से जुड़ी जानकारी जरूर हासिल करनी चाहिए।
पुराने गहनों को EGR में बदलने की क्या है व्यवस्था?
भारतीय परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना आभूषणों के रूप में मौजूद है। इनमें कई ऐसे गहने भी हैं, जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ऐसे सोने को औपचारिक वित्तीय बाजार से जोड़ने की संभावना भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके लिए अधिकृत संग्रह केंद्रों और सोने की शुद्धता जांचने की व्यवस्था की जरूरत होती है। प्रक्रिया के तहत जमा किए गए सोने का वजन और शुद्धता जांची जाती है। जरूरत पड़ने पर आभूषणों को रिफाइन करके निर्धारित मानकों के अनुरूप सोना तैयार किया जाता है। इसके बाद पात्र सोने के अनुरूप EGR जारी की जा सकती हैं।
हालांकि, पुराने गहने जमा कराने और घर से सोना लेने जैसी सुविधाएं हर जगह उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है। यह संबंधित अधिकृत केंद्रों और लागू व्यवस्था पर निर्भर करता है।
भारत के सोने के बाजार को कैसे मिल सकता है फायदा?
भारत दुनिया के प्रमुख सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां त्योहारों, शादियों और पारिवारिक जरूरतों में सोने की अहम भूमिका रहती है। देश अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। दूसरी ओर, भारतीय परिवारों के पास भी बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है।
ऐसे में घरेलू सोने को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना महत्वपूर्ण हो सकता है। NSE का EGR प्लेटफॉर्म निवेशकों को एक्सचेंज के माध्यम से सोने के कारोबार का विकल्प देता है।
इससे कीमतों और कारोबार की जानकारी एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकती है। साथ ही वॉल्ट में रखे वास्तविक सोने और निवेशकों के डीमैट खातों में मौजूद EGR यूनिट का रिकॉर्ड भी निर्धारित व्यवस्था के तहत रखा जाता है।
हालांकि, EGR प्लेटफॉर्म शुरू होने से भारत का सोना आयात तुरंत कम हो जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा। यह फिलहाल सोने के निवेश और कारोबार को अधिक संगठित बनाने की दिशा में एक नया विकल्प है।
धनतेरस पर सोना खरीदने वालों के लिए EGR एक ऐसा विकल्प हो सकता है, जिसमें भौतिक सोने की सुरक्षा की चिंता किए बिना डिजिटल रूप में स्वामित्व रखा जा सकता है। लेकिन निवेश से पहले इसकी ट्रेडिंग, शुल्क, टैक्स और भौतिक डिलीवरी की शर्तों को समझना बेहद जरूरी है।