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No Insurance, No Fuel: बिना बीमा वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल! जानिए क्या है नया नियम

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अगर आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस खत्म हो गया है, तो उसे जल्द से जल्द रिन्यू करा लें। सरकार अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। इस नियम के तहत वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के बिना चलने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से रोका जा सकता है।

देशभर में बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर लगाम लगाने के लिए सरकार और बीमा नियामक IRDAI की ओर से बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में पेट्रोल पंपों को वाहनों के बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाएगा, जिससे गाड़ी का इंश्योरेंस चेक किया जा सकेगा।

पेट्रोल पंप पर नंबर प्लेट स्कैन होगी

नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी ANPR कैमरे लगाए जाने की योजना है। जैसे ही कोई वाहन पेट्रोल या डीजल भरवाने पहुंचेगा, कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन करेगा। अगर वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वैध नहीं पाया गया, तो सिस्टम ईंधन की सप्लाई रोक सकता है।

दिल्ली से शुरू होगा ट्रायल?

खबर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद IRDAI दिल्ली समेत कुछ प्रमुख शहरों में इस व्यवस्था का परीक्षण करने की तैयारी कर रहा है।

मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध बीमा के सड़कों पर चल रहे हैं। प्रस्तावित नियम का उद्देश्य ऐसे वाहनों की पहचान करना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

नई गाड़ियों के इंश्योरेंस को लेकर बदलाव

खबर में नई गाड़ियों के अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि में बदलाव का भी दावा किया गया है।

  • नई कार के लिए 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस।
  • नई बाइक और स्कूटी के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस।

इन अवधियों के बारे में आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि जरूरी है।

हादसे के पीड़ितों को मिल सकती है राहत

बिना बीमा वाले वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यदि सभी वाहनों का वैध थर्ड-पार्टी बीमा सुनिश्चित होता है, तो दुर्घटना पीड़ितों के लिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है।

वहीं, इस व्यवस्था के लागू होने से मोटर इंश्योरेंस कंपनियों के कारोबार पर भी असर पड़ सकता है। अधिक वाहन बीमा के दायरे में आएंगे, जिससे प्रीमियम कलेक्शन बढ़ने की संभावना है।

ध्यान दें: ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था, ANPR कैमरों की अनिवार्य तैनाती और नई गाड़ियों के इंश्योरेंस की 4 व 6 साल की अवधि को लेकर आधिकारिक सरकारी अधिसूचना की पुष्टि किए बिना इन्हें लागू नियम न मानें।

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