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PM मोदी ने किया ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ का उद्घाटन, युवा शक्ति और विकसित भारत के संकल्प पर दिया जोर

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति को मजबूत भारत की नींव बताते हुए कहा कि युवाओं की क्षमताओं को विकसित करना और उन्हें राष्ट्र निर्माण से जोड़ना देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी पुरानी मुलाकात और उनसे मिले आशीर्वाद को भी याद किया। इस वैश्विक आयोजन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात की यादें साझा कीं

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुरुदेव के होलोग्राम को देखना और उनसे बातचीत का अनुभव उनके लिए भावुक क्षण था।

उन्होंने वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात का उल्लेख किया और कहा कि उस समय गुरुदेव के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उनकी स्मृतियों में हैं। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

युवा शक्ति से मजबूत भारत बनाने का संदेश

प्रधानमंत्री ने युवा सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के साथ उनकी चर्चाओं में युवाओं को सक्षम बनाने और उनके माध्यम से मजबूत भारत के निर्माण का विचार प्रमुख रहा था।

मोदी ने अपनी सार्वजनिक जीवन की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने से लेकर सरकार के प्रमुख के तौर पर काम करने तक, गुरुदेव का आशीर्वाद उनके साथ रहा।

उन्होंने युवाओं की प्रतिभा को अवसर देने, उनकी क्षमता विकसित करने और उन्हें देश की प्रगति में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विकसित भारत के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा

प्रधानमंत्री ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और विचारों को दुनिया के सामने रखने का भी अवसर था।

उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा मानवता के कल्याण की व्यापक सोच प्रस्तुत करती है। आने वाली पीढ़ियों तक इस विरासत को पहुंचाना और आधुनिक समय में इसकी प्रासंगिकता को समझना भी जरूरी है।

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर वैश्विक आयोजन

‘चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन’ का आयोजन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में किया जा रहा है। यह चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सालभर के कार्यक्रमों का समापन समारोह है।

स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में चिन्मय मिशन की स्थापना की थी। मिशन का प्रमुख उद्देश्य वेदांत और भगवद्गीता के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाना है। इसके अतिरिक्त, संगठन आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और समाजसेवा के क्षेत्रों में भी सक्रिय रहा है।

आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्र निर्माण पर मंथन

तीन दिवसीय सम्मेलन में आध्यात्मिक विचारों, भारतीय संस्कृति, युवा शक्ति और भविष्य के भारत जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्र निर्माण के बीच संबंध को रेखांकित करने वाला रहा।

इस आयोजन के माध्यम से चिन्मय मिशन की 75 वर्षों की यात्रा और समाज में उसके योगदान को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

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