रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर हुई ट्रोलिंग पर कृति ने तोड़ी चुप्पी, संस्कृति और सम्मान की दुहाई देने वालों के व्यवहार पर उठाए सवाल
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन एक बार फिर अपने रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा में हैं। विज्ञापन में पहने गए कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर हुई ट्रोलिंग पर अब अभिनेत्री ने खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर महिलाओं के पहनावे को इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना दिया जाता है और उनकी पसंद पर फैसला सुनाने का अधिकार दूसरों को किसने दिया?
करीना कपूर खान के कार्यक्रम ‘व्हाट वीमेन वॉन्ट’ में बातचीत के दौरान कृति ने बताया कि उन्हें इस बात पर हैरानी हुई कि उनके कपड़ों को लेकर प्राइम टाइम टेलीविजन पर बहस होने लगी। अभिनेत्री के मुताबिक, यह विवाद केवल उनके पहनावे तक सीमित नहीं था, बल्कि महिलाओं के प्रति समाज के नजरिए से जुड़ा एक बड़ा सवाल था।
‘मेरी चोली पर प्राइम टाइम में बहस होने लगी’
कृति सेनन ने विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उनके पहनावे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया गया है।
अभिनेत्री ने कहा, “मेरी चोली एक राष्ट्रीय बहस का विषय बन गई। मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मेरी चोली को लेकर प्राइम टाइम न्यूज पर छह लोगों का पैनल डिस्कशन हो रहा है। मैं सोच रही थी, आखिर चल क्या रहा है?”
कृति के इस बयान ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर महिलाओं के पहनावे और उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
‘हर छोटी बात पर महिलाओं को ही निशाना क्यों बनाया जाता है?’
अभिनेत्री ने कहा कि उन्हें लगा कि मामला केवल उनके कपड़ों का नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति समाज के रवैये का है। उनके अनुसार, महिलाओं की पसंद, व्यवहार और जीवनशैली पर लगातार सवाल उठाए जाते हैं और छोटी-छोटी बातों पर भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है।
कृति ने इस तरह की नफरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर महिलाओं को निशाना बनाने की जरूरत क्यों महसूस की जाती है।
उनकी बात का मूल संदेश यही था कि किसी महिला के कपड़ों के आधार पर उसके चरित्र, संस्कार या संस्कृति का आकलन करना उचित नहीं है।
संस्कृति और सम्मान की बात करने वालों पर भी साधा निशाना
कृति सेनन ने विवाद के दौरान सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने संस्कृति और सम्मान की बात करते हुए उनके माता-पिता और बहन की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी अभद्र टिप्पणियां कीं।
अभिनेत्री ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति संस्कृति और सम्मान की रक्षा करने का दावा करता है, तो उसके व्यवहार और भाषा में भी उस सम्मान की झलक दिखाई देनी चाहिए।
उनके मुताबिक, किसी के पहनावे से असहमति जताने के नाम पर उसके परिवार को निशाना बनाना किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता।
क्या था रक्षाबंधन विज्ञापन का पूरा विवाद?
यह विवाद आभूषण ब्रांड जीवा के रक्षाबंधन विज्ञापन के बाद शुरू हुआ था। विज्ञापन में कृति सेनन इंडो-वेस्टर्न पोशाक में नजर आई थीं। इसमें वह अपने भाई और पालतू कुत्ते को राखी बांधकर त्योहार मनाती दिखाई दी थीं।
विज्ञापन में उनके पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आपत्ति जताई। कुछ यूजर्स ने कपड़ों को अनुचित बताया, जिसके बाद अभिनेत्री को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। विवाद बढ़ने के बाद ब्रांड ने विज्ञापन हटा दिया।
इस घटना ने परंपरा, संस्कृति और महिलाओं के पहनावे को लेकर सोशल मीडिया से लेकर टेलीविजन तक बहस छेड़ दी थी।
‘संस्कृति कपड़ों में नहीं, दिल में होती है’
इससे पहले भी कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया था कि महिलाओं को क्या पहनना चाहिए, यह तय करने का अधिकार आखिर दूसरों के पास क्यों होना चाहिए?
अभिनेत्री ने यह विचार भी रखा था कि समय के साथ फैशन और पहनावे में बदलाव आता रहता है, लेकिन महिलाओं के संस्कृति के प्रति सम्मान को उनके कपड़ों से जोड़कर देखना सही नहीं है।
उनका संदेश साफ था—संस्कृति और परंपराओं का संबंध व्यक्ति के विचारों, मूल्यों और व्यवहार से है, केवल कपड़ों से नहीं।
कृति सेनन की इस प्रतिक्रिया ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि किसी के पहनावे पर असहमति जताना कहां तक उचित है और आलोचना कब व्यक्तिगत अपमान में बदल जाती है। किसी भी बहस में असहमति की जगह हो सकती है, लेकिन सम्मान और शालीनता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।