बलौदा बाजार। पिछले 24 घंटे तक उफान पर रही महानदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम होने लगा है। नदी का पानी घटने के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में जनजीवन को पटरी पर लाने की कोशिश शुरू हो गई है। हालांकि पानी उतरने के बाद भी गांवों में बाढ़ से हुई तबाही की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। कई घरों में कीचड़ और गाद जमा है, तो कहीं घरेलू सामान पूरी तरह खराब हो चुका है।
घरों में घुसा पानी, अब सामान समेटने की जद्दोजहद
बाढ़ प्रभावित गांवों में लोग अपने घरों की सफाई और बचा हुआ सामान सुरक्षित करने में जुटे हैं। किसी के घर से गीले कपड़े निकाले जा रहे हैं तो कहीं टीवी, फ्रिज और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान बाहर रखे नजर आ रहे हैं। कई घरों में बाढ़ का पानी करीब 7 से 10 फीट तक पहुंच गया था।
पानी उतरने के बाद परिवार अपने घरों में वापस लौटकर नुकसान का जायजा ले रहे हैं। कई मकानों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, जबकि घर के अंदर रखा सामान पानी और कीचड़ की वजह से खराब हो गया है।
निषाद परिवार की गृहस्थी पर बाढ़ की मार
नदी किनारे रहने वाले एक निषाद परिवार के लिए बाढ़ ने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। परिवार की आजीविका मुख्य रूप से मछली पालन पर निर्भर है। बाढ़ का पानी घर में घुसने से कपड़े, टीवी, फ्रिज समेत कई घरेलू सामान खराब हो गए।
अब परिवार के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं—बाढ़ से क्षतिग्रस्त घर को संभालना और रोजी-रोटी का इंतजाम दोबारा करना। पानी उतरने के बाद परिवार के सदस्य घर से सामान निकालकर उसे साफ करने में जुटे हैं। कुछ सामान के दोबारा इस्तेमाल की उम्मीद है, जबकि बड़ी मात्रा में सामान पूरी तरह खराब हो चुका है।
20 साल में ऐसी बाढ़ नहीं देखी, ग्रामीणों का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक महानदी का जलस्तर बढ़ना उनके लिए नया नहीं है, लेकिन करीब दो दशक में इस बार जैसी स्थिति उन्होंने नहीं देखी। उनका कहना है कि बाढ़ का पानी कई घरों के भीतर 7 से 8 फीट तक पहुंच गया था।
बाढ़ बढ़ने के दौरान कई परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि बीती दो रातें बेहद डरावनी रहीं। एक तरफ उफनती महानदी और दूसरी तरफ पानी में डूबती गृहस्थी के बीच लोगों ने रात गुजारी।
सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित, किसानों को भी बड़ा नुकसान
बाढ़ की चपेट में नदी किनारे और आसपास के इलाकों में स्थित खेत भी आ गए। बड़ी मात्रा में फसल पानी में डूब गई। किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने के साथ ही कई परिवारों के मकान और घरेलू सामान भी बर्बाद हुए हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक इस बाढ़ में किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है। प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की सक्रियता से बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया गया।
पानी उतरने के बाद शुरू होगी असली चुनौती
महानदी का जलस्तर भले ही अब नीचे जा रहा है, लेकिन प्रभावित इलाकों में हालात सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। लोगों के सामने घरों की सफाई, कीचड़ और गाद हटाने, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और खराब सामान को हटाने की चुनौती है। इसके साथ ही खेतों में हुए नुकसान का आकलन और प्रभावित परिवारों के लिए दोबारा आजीविका खड़ी करना भी बड़ी चुनौती होगी।
कई मार्ग अब भी प्रभावित, पुलों पर पानी का असर
जिले के कई इलाकों में बाढ़ का पानी पुलों के ऊपर से बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। पड़ोसी जिलों से जोड़ने वाले कुछ मार्गों पर आवाजाही बंद है। पुलों से पानी पूरी तरह उतरने और जलस्तर सामान्य होने के बाद ही इन मार्गों पर यातायात बहाल हो सकेगा।
तबाही के बीच फिर जिंदगी शुरू करने की कोशिश
बलौदा बाजार के बाढ़ प्रभावित गांवों में अब पानी कम हो रहा है, लेकिन उसके निशान हर तरफ दिखाई दे रहे हैं। कहीं मकानों की दीवारें क्षतिग्रस्त हैं, तो कहीं कीचड़ में घरेलू सामान पड़ा है। कई घरों के भीतर अब भी गाद की मोटी परत जमा है।
इन मुश्किल हालात के बीच ग्रामीण अपने दम पर जिंदगी को फिर से व्यवस्थित करने में जुट गए हैं। कोई घर की सफाई कर रहा है तो कोई दोबारा चूल्हा जलाने की तैयारी में है। बाढ़ ने लोगों की गृहस्थी को बड़ा नुकसान जरूर पहुंचाया है, लेकिन अब पानी उतरने के साथ प्रभावित परिवार अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश में जुट गए हैं।