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बलराम जयंती के अवसर पर दलहनी-तिलहनी फसलों एवं प्राकृतिक खेती पर संगोष्ठी आयोजित

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दुर्ग, 16 सितम्बर 2026/ बलराम जयंती के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, पाहंदा-अ दुर्ग द्वारा किसानों में दलहनी एवं तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से ’दलहनी-तिलहनी फसलों की उन्नत खेती एवं प्राकृतिक खेती’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अनिल वर्मा, अधिष्ठाता संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र मर्रा रहे। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. विजय जैन की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि डॉ. अनिल वर्मा ने दलहनी एवं तिलहनी फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने तथा टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, पाहंदा-अ दुर्ग के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विजय जैन ने किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित विभिन्न तकनीकी प्रसार एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी देते हुए वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दलहनी एवं तिलहनी फसलों को फसल प्रणाली में शामिल करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया।
इस अवसर पर श्री मनीष कुमार वर्मा ने दलहनी एवं तिलहनी फसलों में खरपतवार नियंत्रण की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने फसल की प्रारंभिक अवस्था में खरपतवार नियंत्रण के महत्व तथा यांत्रिक एवं रासायनिक विधियों के उचित उपयोग के बारे में बताया।
डॉ. ईश्वरी ने कीट नियंत्रण एवं समन्वित कीट प्रबंधन विषय पर किसानों को जानकारी देते हुए प्रमुख कीटों की पहचान, निगरानी एवं उचित नियंत्रण उपायों के बारे में विस्तार से बताया।
डॉ आरती वर्मा ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्राकृतिक खेती में जैव-इनपुट के उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, कृषि लागत में कमी तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में किसानों को जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की तथा प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। संगोष्ठी में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों एवं क्षेत्र के किसानों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक, टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों से जोड़ना तथा दलहनी-तिलहनी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करना रहा।

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