रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुंचीं प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने पहले ही दिन संगठन के कामकाज को लेकर सख्त रुख दिखाया। रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि परिसर में इतनी भीड़ जुटाने का क्या औचित्य है। साथ ही संगठन के पदाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन नेताओं की जिस समय बैठक निर्धारित है, उन्हें उसी समय बुलाया जाए।
स्मृति ईरानी ने रायपुर प्रवास के पहले दिन सुबह से शाम तक लगातार संगठनात्मक बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने पार्टी की कार्यप्रणाली, संगठन को मजबूत करने और पार्टी की रीति-नीति पर चर्चा की। बैठकों में अनुशासन और निर्धारित व्यवस्था का पालन करने पर भी जोर दिया गया।
भीड़ देखकर जताई नाराजगी
विमानतल से सीधे कुशाभाऊ ठाकरे परिसर पहुंचने पर स्मृति ईरानी ने वहां बड़ी संख्या में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं को देखकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने पूछा कि इतने लोगों को परिसर में किस उद्देश्य से बुलाया गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अपने-अपने बूथ पर जाकर काम करने की सलाह देते हुए कहा कि बिना किसी काम के परिसर में भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। इस दौरान एक महिला नेत्री ने उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
बैठक में उन्हीं को प्रवेश, जिनका था समय
‘मन की बात’ कार्यक्रम के बाद जब संगठनात्मक बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ, तो परिसर में प्रवेश के नियमों का सख्ती से पालन कराया गया। जिन पदाधिकारियों और नेताओं की बैठक निर्धारित थी, उन्हें ही तय समय पर अंदर जाने दिया गया। सभी को एक साथ प्रवेश देने के बजाय बैठक के समय के अनुसार बुलाया गया। इसके चलते कई नेताओं को अपनी बारी आने तक परिसर के बाहर इंतजार करना पड़ा।
मंत्रियों और विधायकों के वाहनों को भी रोका
कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में प्रवेश के दौरान मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और अन्य नेताओं के वाहनों को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। प्रदेश के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक धरमलाल कौशिक, पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय, भूपेंद्र सवन्नी सहित निगम, मंडल और आयोगों के अध्यक्षों तथा पूर्व सांसदों और विधायकों के वाहन परिसर के बाहर ही रोक दिए गए। नेताओं के साथ पहुंचे अन्य लोगों को भी बाहर रहने के लिए कहा गया।
‘मैडम’ शब्द के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी
बैठकों के दौरान स्मृति ईरानी ने पार्टी के भीतर संबोधन की शैली पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पार्टी में ‘मैडम’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि देश में एक ही ‘मैडम’ हैं और वह सोनिया गांधी हैं। उनके इस बयान को संगठन के भीतर अनुशासन और संबोधन की परंपरा को लेकर दिए गए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।