नई दिल्ली। GST काउंसिल की 8 अक्टूबर को हुई 57वीं बैठक में लिए गए कई अहम फैसले 1 नवंबर से लागू होने की तैयारी है। इन बदलावों का उद्देश्य छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों के लिए GST रजिस्ट्रेशन आसान बनाना, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिफंड की प्रक्रिया तेज करना और छोटी टैक्स गड़बड़ियों पर अनावश्यक नोटिस जारी करने से बचना है। सूत्रों के मुताबिक, इन फैसलों से संबंधित अधिसूचना अगले एक-दो दिनों में जारी हो सकती है।
GST रिटर्न के नए फॉर्म का ड्राफ्ट 1 नवंबर को
सरकार GST रिटर्न फॉर्म में बदलाव के लिए 1 नवंबर को ड्राफ्ट जारी कर सकती है। प्रस्तावित बदलावों को 1 अप्रैल से लागू करने की योजना है। कारोबारी और अन्य संबंधित पक्ष 30 नवंबर तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव दे सकेंगे।
GSTR-1 में गलती सुधारने के लिए भरना होगा अलग फॉर्म
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत GST रिटर्न में संशोधन की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल GSTR-1 में दर्ज किसी जानकारी में गलती होने पर कारोबारी अगले महीने उसी फॉर्म में सुधार कर सकते हैं।
लेकिन नई व्यवस्था लागू होने पर संशोधन के लिए अलग से GSTR-1A फॉर्म भरना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कारोबारी ने 5 लाख रुपये की बिक्री के स्थान पर गलती से 50 हजार रुपये दर्ज कर दिए, तो उसे सुधार के लिए निर्धारित संशोधन प्रक्रिया अपनानी होगी।
टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक, रिटर्न में बार-बार सीधे बदलाव होने से डेटा प्रोसेसिंग और मिलान में समस्याएं आ सकती हैं। अलग संशोधन फॉर्म से रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने और गलतियों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ITC रिफंड के नियमों से निर्यातकों और निर्माताओं को राहत
प्रस्तावित बदलावों में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिफंड से जुड़े प्रावधान भी महत्वपूर्ण हैं। इससे पात्र निर्यातकों और उन निर्माताओं को फायदा मिल सकता है, जिनके इनपुट पर GST की दर तैयार उत्पाद की दर से अधिक होती है।
- सेवा निर्यातक: यदि कोई कंसल्टेंट विदेश में सेवाएं देता है और व्यवसाय के लिए कंप्यूटर या एयर कंडीशनर खरीदता है, तो लागू नियमों और पात्रता की शर्तें पूरी होने पर वह ITC का लाभ ले सकता है।
- निर्माता: जो कारोबारी 18 प्रतिशत GST पर कच्चा माल खरीदते हैं और तैयार उत्पाद 5 प्रतिशत GST पर बेचते हैं, उन्हें भी पात्रता के अनुसार रिफंड का दावा करने की सुविधा मिल सकती है।
इन बदलावों से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी पर दबाव कम करने और रिफंड प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक लाभ संबंधित अधिसूचना और लागू शर्तों पर निर्भर करेगा।
GST अपीलीय न्यायाधिकरण में करीब एक लाख अपीलें लंबित
दूसरी ओर, GST अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) में लंबित मामलों और गलत पीठ में दाखिल अपीलों का मुद्दा भी सामने आया है। न्यायाधिकरण के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय कुमार मिश्रा ने कारोबारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स की ओर से दाखिल मामलों में प्रक्रियागत गलतियों पर चिंता जताई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देशभर की GSTAT पीठों में करीब एक लाख अपीलें लंबित हैं, जबकि लगभग 250 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
मुख्य पीठ में आए करीब 7,000 मामलों में से लगभग 95 प्रतिशत मामले उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इसके चलते रोजाना औसतन 40 से 50 अर्जियों को मुख्य पीठ से हटाकर संबंधित राज्य पीठों में स्थानांतरित करना पड़ रहा है।
कारोबारियों की नजर अधिसूचना पर
GST से जुड़े इन प्रस्तावित बदलावों से छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं, निर्यातकों और निर्माताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, नियमों की अंतिम स्थिति और लागू होने की तारीख की पुष्टि आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी। कारोबारियों के लिए नए प्रावधानों को समझना और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में होने वाले बदलावों के अनुरूप तैयारी करना जरूरी होगा।