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मूसलाधार बारिश बनी आफत : केशकाल क्षेत्र के मातेंगा से बाढ़ के तेज बहाव में बह गए तीन बैल

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केशकाल। पिछले दो-तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं। कोंडागांव जिले के मातेंगा गांव में बहने वाले नाले ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया। अचानक आई बाढ़ के तेज बहाव ने खेत-खलिहानों, बाड़ियों और सड़क किनारे के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद गांव में नुकसान का भयावह मंजर सामने आया है।

ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के तेज बहाव में खूंटे से बंधे तीन बैल बह गए, जिससे पशुपालक परिवारों को बड़ा नुकसान हुआ है। वहीं, सैकड़ों एकड़ में लगी फसल पानी की भेंट चढ़ गई। किसानों की महीनों की मेहनत देखते ही देखते बर्बाद हो गई।

उपजाऊ खेत बनीं गहरी नालियां
बाढ़ के पानी ने खेतों में जबरदस्त मिट्टी कटाव किया है। कई स्थानों पर उपजाऊ जमीन गहरी नालियों में तब्दील हो गई है। किसानों के सामने अब केवल फसल नुकसान की समस्या नहीं, बल्कि खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाने की बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि खेतों को पहले की स्थिति में लाने में भारी रकम खर्च हो सकती है। जिस जमीन से किसानों के परिवारों की आजीविका चलती थी, वही जमीन अब उनके लिए चिंता का कारण बन गई है। एक ओर पूरी फसल बर्बाद हो गई, वहीं दूसरी ओर खेतों को सुधारने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ किसानों के सामने आ खड़ा हुआ है।

फसल गई, मवेशी गए, अब सहारा कौन बनेगा?
बाढ़ ने मातेंगा के ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। किसानों की फसल, मवेशी और खेतों को हुए नुकसान ने उनकी आर्थिक स्थिति को झकझोर दिया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रशासन ने नुकसान का आकलन कर राहत नहीं पहुंचाई तो प्रभावित परिवारों के लिए इस संकट से उबरना मुश्किल होगा। अब ग्रामीणों की नजर शासन-प्रशासन पर टिकी है। प्रभावित किसानों ने तत्काल नुकसान का सर्वे, फसल एवं पशुधन क्षति का उचित आकलन तथा नियमानुसार मुआवजा और राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रशासन से तत्काल सर्वे की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान का मौके पर पहुंचकर तत्काल सर्वे कराया जाए, ताकि वास्तविक क्षति सामने आ सके और प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके। किसानों का कहना है कि उनकी वर्षों की मेहनत और आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई के लिए शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ पहल करनी चाहिए। अब सवाल यही है कि बाढ़ की इस तबाही के बाद मातेंगा के किसानों और प्रभावित परिवारों का सहारा कौन बनेगा?

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