फल संतुलित और पौष्टिक डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि पूरा फल खाना बेहतर है या उसका जूस पीना? खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हार्ट से जुड़ी समस्या वाले लोगों के लिए फल और जूस के बीच अंतर समझना जरूरी है।
पूरा फल खाने के फायदे
पूरे फल में गूदा, पानी और फाइबर मौजूद रहता है। यही फाइबर पाचन की प्रक्रिया को धीमा करने और फल में मौजूद प्राकृतिक शुगर के शरीर में अपेक्षाकृत धीरे पहुंचने में मदद करता है।
1. फाइबर की मात्रा बनी रहती है
सेब, संतरा, अमरूद, पपीता जैसे फलों को पूरा खाने पर उनका फाइबर भी शरीर को मिलता है। फाइबर पाचन को धीमा करने और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है।
2. ब्लड शुगर पर असर अपेक्षाकृत नियंत्रित रह सकता है
पूरे फल में मौजूद फाइबर शुगर के पाचन और अवशोषण की गति को धीमा करने में मदद करता है। इसलिए रोजाना की डाइट में आम तौर पर पूरे फल को जूस की तुलना में प्राथमिकता दी जाती है।
3. ज्यादा मात्रा में फल लेने से बचना आसान
एक गिलास जूस तैयार करने में कई फलों का इस्तेमाल हो सकता है और उसे कुछ ही मिनटों में पी लिया जाता है। इसके मुकाबले पूरा फल खाने में अधिक समय लगता है और मात्रा को नियंत्रित करना आसान हो सकता है।
जूस पीते समय किन बातों का रखें ध्यान?
फ्रूट जूस में फल के कुछ विटामिन और दूसरे पोषक तत्व मौजूद रह सकते हैं, लेकिन जूस बनाने की प्रक्रिया में फाइबर की मात्रा काफी कम हो सकती है। यही वजह है कि 100% फ्रूट जूस भी पूरे फल का पूरी तरह विकल्प नहीं माना जाता।
जूस में फाइबर और पेट भरने वाला प्रभाव कम होने के कारण कम समय में अधिक मात्रा में प्राकृतिक शुगर का सेवन हो सकता है। इसलिए रोजाना के सेवन के लिए पूरे फल को प्राथमिकता देना आम तौर पर बेहतर विकल्प माना जाता है।
डायबिटीज में फल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं
डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि फल डाइट से पूरी तरह हटा दिए जाएं। ज्यादा महत्वपूर्ण है फल की मात्रा, उसका प्रकार और पूरे दिन के कुल कार्बोहाइड्रेट सेवन पर ध्यान देना।
पूरे फल को सीमित मात्रा में नट्स, बीज या बिना अतिरिक्त चीनी वाले दही जैसे प्रोटीन या हेल्दी फैट वाले विकल्पों के साथ लिया जा सकता है। इससे स्नैक अधिक संतोषजनक हो सकता है।
हाई BP और हार्ट मरीजों के लिए क्या बेहतर?
हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी बीमारी होने पर बिना चिकित्सकीय कारण फलों को डाइट से हटाने की जरूरत नहीं होती। संतुलित मात्रा में पूरा फल स्वस्थ डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
सेब, संतरा, अमरूद, सीमित मात्रा में पपीता और बेरीज जैसे फल विकल्प हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति की बीमारी, दवाओं और पूरी डाइट के आधार पर जरूरत अलग हो सकती है।
निष्कर्ष: अगर विकल्प पूरा फल और जूस के बीच है, तो रोजाना की डाइट में आम तौर पर पूरा फल बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे फाइबर और पेट भरने वाला प्रभाव अधिक मिलता है। जूस लेना हो तो बिना अतिरिक्त चीनी वाला और सीमित मात्रा में लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। डायबिटीज, हार्ट डिजीज, किडनी की बीमारी या अन्य स्वास्थ्य समस्या होने पर अपनी डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लें।