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World Bank Report 2026: भारत में गरीबी पर बड़ी चोट! 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, अत्यधिक गरीबी घटकर 2.6% पर

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नई दिल्ली। भारत में गरीबी कम करने के प्रयासों को लेकर विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। अक्टूबर 2026 की पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के अनुसार, वर्ष 2011 से 2023 के बीच भारत में 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाले निम्न-मध्यम आय गरीबी मानक से ऊपर आए। इसी अवधि में 3 डॉलर प्रतिदिन वाले अंतरराष्ट्रीय मानक के आधार पर अत्यधिक गरीबी की दर 27.1 प्रतिशत से घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू उपभोग में वृद्धि, रोजगार के अवसरों का विस्तार और सरकारी सामाजिक सहायता योजनाओं ने गरीबी कम करने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, क्षेत्रीय असमानता, युवाओं की बेरोजगारी और रोजगार से होने वाली कम कमाई जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

अत्यधिक गरीबी की दर 27.1% से घटकर 2.6% पर पहुंची

विश्व बैंक के आकलन के अनुसार, भारत में वर्ष 2011 में 27.1 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गरीबी में जीवन बिता रही थी। वर्ष 2023 तक यह अनुपात घटकर 2.6 प्रतिशत रह गया।

वहीं, प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम संसाधनों पर जीवन बिताने वाली आबादी का अनुपात भी 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत पर आ गया। यह मानक 2021 की क्रय शक्ति समानता (PPP) पर आधारित है।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में गरीबी के मौद्रिक मानकों पर उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हालांकि, गरीबी का आकलन इस्तेमाल किए गए मानक, घरेलू उपभोग के आंकड़ों और सर्वेक्षण की पद्धति पर भी निर्भर करता है।

रोजगार, घरेलू खर्च और खाद्य सब्सिडी से मिली मदद

रिपोर्ट में गरीबी में आई गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण बताए गए हैं। इनमें घरेलू उपभोग में बढ़ोतरी, रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि और सामाजिक सहायता योजनाओं का विस्तार शामिल है।

खासतौर पर महिलाओं की रोजगार में बढ़ती भागीदारी ने परिवारों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में योगदान दिया। इसके अलावा, मुफ्त या रियायती खाद्यान्न जैसी योजनाओं से कम आय वाले परिवारों को जरूरी वस्तुओं पर होने वाला खर्च संभालने में मदद मिली।

हालांकि, गरीबी में कमी का आकलन करते समय यह देखना भी जरूरी है कि परिवारों की वास्तविक कमाई, रोजगार की स्थिरता और जीवन-यापन की लागत में कितना बदलाव आया है।

बहुआयामी गरीबी में भी उल्लेखनीय गिरावट

गरीबी केवल कम आय तक सीमित नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी किसी परिवार के जीवन स्तर को प्रभावित करती है। इसी वजह से बहुआयामी गरीबी के आंकड़े भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव के बहुआयामी गरीबी सूचकांक के अनुसार, भारत में गरीबी की दर 2005-06 के 53.8 प्रतिशत से घटकर 2019-21 में 16.4 प्रतिशत रह गई।

वहीं, विश्व बैंक के अपने बहुआयामी गरीबी मापदंड के अनुसार, वर्ष 2022-23 में यह दर 15.5 प्रतिशत थी। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि आय के अलावा जीवन स्तर से जुड़े कई क्षेत्रों में भी सुधार हुआ है।

उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक गरीब आबादी का बड़ा हिस्सा

राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी में कमी के बावजूद इसका वितरण सभी राज्यों में समान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कुल गरीब आबादी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले एक भौगोलिक क्षेत्र में केंद्रित है। इस क्षेत्र में बिहार और झारखंड जैसे राज्य भी शामिल हैं।

इस स्थिति को देखते हुए इन राज्यों में बेहतर रोजगार के अवसर पैदा करना गरीबी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है। विशेष रूप से ऐसे रोजगार की जरूरत है, जिनसे लोगों की उत्पादकता और नियमित कमाई बढ़ सके।

छह साल में 13.4 करोड़ रोजगार बढ़े, फिर भी चुनौतियां बरकरार

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में लगभग 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी कामकाजी उम्र की आबादी में हुए इजाफे से लगभग दोगुनी थी।

रिपोर्ट में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी को भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। हालांकि, रोजगार की संख्या बढ़ना और अच्छी आय वाला स्थायी रोजगार मिलना दो अलग-अलग बातें हैं।

रिपोर्ट में युवाओं की बेरोजगारी को लेकर भी चिंता जताई गई है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी दर 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 15.9 प्रतिशत होने का उल्लेख किया गया है। ग्रामीण युवा महिलाओं के सामने भी रोजगार से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

इसके अलावा, रोजगार का बड़ा हिस्सा अपेक्षाकृत कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में होने के कारण वास्तविक कमाई में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है।

गरीबी कम करने के बाद अब रोजगार की गुणवत्ता पर जोर जरूरी

विश्व बैंक की रिपोर्ट भारत में गरीबी कम करने की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित करती है। अत्यधिक गरीबी की दर में गिरावट और करोड़ों लोगों का उच्च गरीबी मानक से ऊपर आना महत्वपूर्ण बदलाव हैं।

लेकिन इस प्रगति को स्थायी बनाने के लिए केवल रोजगार की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। बेहतर वेतन, नियमित रोजगार, कौशल विकास और पिछड़े क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों का विस्तार भी जरूरी है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट भारत में गरीबी में आई बड़ी गिरावट की तस्वीर पेश करती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने के लिए रोजगार और क्षेत्रीय असमानता जैसी चुनौतियों पर लगातार काम करना होगा।

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