Chhattisgarh Vegetable Price: छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर थमने के बाद भी खेतों में जलभराव का असर साफ नजर आ रहा है। इस बार भारी बारिश और लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से धान की तुलना में सब्जी की फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। टमाटर, मिर्च, खीरा, बरबट्टी, लौकी और हरी भाजी जैसी फसलों पर पानी का प्रतिकूल असर पड़ा है।
फसल खराब होने और उत्पादन घटने की आशंका के बीच आने वाले दिनों में सब्जियों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल बाजार में टमाटर करीब 35 से 40 रुपये किलो तक बिक रहा है।
कई जिलों में जलभराव से खेती प्रभावित
भारी बारिश और बाढ़ का असर रायपुर के अलावा बस्तर, दुर्ग, रायगढ़, धमतरी, बिलासपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा समेत कई जिलों में देखने को मिला है।
रायपुर के अभनपुर क्षेत्र के पारागांव, नवापारा और कुटीपारा जैसे ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी जमा होने से सब्जी उत्पादक किसान परेशान हैं। भाठागांव और काठाडीह क्षेत्र में भी सब्जी की फसलों पर बारिश का असर पड़ा है।
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अत्यधिक बारिश के कारण सबसे ज्यादा नुकसान सब्जियों की फसलों को होने की आशंका है।
कई दिनों तक पानी जमा रहने से जड़ें सड़ने लगीं
खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से पौधों की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका सीधा असर फसल की सेहत पर पड़ता है।
टमाटर, मिर्च और धनिया जैसी फसलों की जड़ें गलने और काली पड़ने लगी हैं। कई जगह पौधे हरे दिखाई देने के बावजूद कमजोर होकर सूखने लगे हैं।
वहीं खीरा, बरबट्टी और लौकी जैसी बेल वाली सब्जियों पर भी अत्यधिक नमी का असर पड़ा है। पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक और लालभाजी के पौधे पानी और कीचड़ के संपर्क में आने से सड़ने लगे हैं।
फूल और छोटे फल भी गिर रहे
लगातार बारिश का असर केवल तैयार फसल पर ही नहीं पड़ा है। पौधों में आने वाले फूल और छोटे फल भी अधिक नमी और बारिश के कारण टूटकर गिर रहे हैं।
इससे किसानों को तत्काल नुकसान के साथ आने वाले हफ्तों में भी उत्पादन में कमी की चिंता है। यदि खेतों से पानी जल्द नहीं निकला तो कई इलाकों में सब्जियों की अगली पैदावार भी प्रभावित हो सकती है।
किसान फसल बचाने में जुटे
भाठागांव के सब्जी उत्पादक किसान रमेश सोनकर के मुताबिक, खेतों में पानी भरने से टमाटर और भाजी की फसल को काफी नुकसान हुआ है। किसान लगातार पानी निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि खीरा और लौकी की फसल को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि अधिक पानी के कारण पालक खराब होने लगी है। हरी मिर्च और धनिया की फसल पर भी बारिश का असर दिखाई दे रहा है।
3.96 लाख हेक्टेयर में होती है सब्जियों की खेती
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में करीब 3.96 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों की खेती की जाती है।
जलभराव वाले इलाकों और प्रमुख सब्जी उत्पादक क्षेत्रों को आधार मानें तो शुरुआती अनुमान में करीब 10 से 12 हजार हेक्टेयर सब्जी क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि नुकसान का वास्तविक आंकड़ा फसल सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
उत्पादन घटा तो बढ़ सकती हैं कीमतें
बारिश से फसल को हुए नुकसान का असर अब धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देने लगा है। यदि प्रभावित क्षेत्रों से सब्जियों की आवक कम होती है और उत्पादन में गिरावट आती है, तो आने वाले दिनों में टमाटर, हरी मिर्च, भाजी और अन्य मौसमी सब्जियों के दाम बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल किसानों की प्राथमिकता खेतों से पानी निकालकर बची हुई फसल को सुरक्षित करना है। वहीं, नुकसान का वास्तविक आकलन होने के बाद ही किसानों को होने वाली क्षति की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।