रायपुर। राजधानी रायपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार को बड़ी संख्या में गुमशुदगी के मामले सामने आए। पुलिस कमिश्नरेट और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में महज 24 घंटे के भीतर 150 से अधिक लोगों के लापता होने की शिकायतें दर्ज की गईं। शिकायतों के बाद पुलिस ने कई मामलों में अपहरण की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में मामले दर्ज होने से पुलिस महकमे में भी हलचल बढ़ गई। हालांकि, पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इसके पीछे एक महत्वपूर्ण वजह गुमशुदगी के मामलों में एफआईआर दर्ज करने को लेकर लागू प्रक्रिया में बदलाव है।
गुमशुदगी की शिकायत पर अब FIR दर्ज
बताया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद गुमशुदगी से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई का तरीका बदला है। पहले कई मामलों में सिर्फ गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कर खोजबीन की औपचारिकता की जाती थी।
अब शिकायत मिलने के बाद संबंधित मामलों में नियमानुसार FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। इसी वजह से एक ही दिन में दर्ज मामलों की संख्या अचानक काफी ज्यादा दिखाई दे रही है।
महिलाओं की संख्या ज्यादा
पुलिस के अनुसार दर्ज किए गए गुमशुदगी के मामलों में महिलाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है। पुलिस प्रारंभिक स्तर पर कुछ मामलों में घरेलू विवाद, घरेलू हिंसा और प्रेम-प्रसंग जैसी वजहों की आशंका के आधार पर जांच कर रही है।
हालांकि, किसी मामले में लापता होने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
BNS की धारा 140 के तहत कार्रवाई
पुलिस ने कई गुमशुदगी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित थानों की पुलिस ने मामलों को दर्ज कर लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी है।
अब पुलिस लापता व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ उनके संभावित ठिकानों और संपर्कों की पड़ताल कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि लापता लोगों को जल्द से जल्द तलाश कर उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।
अचानक बढ़े आंकड़ों को लेकर क्या है वजह?
एक दिन में 150 से अधिक मामले सामने आने का आंकड़ा पहली नजर में बेहद बड़ा लग सकता है, लेकिन पुलिस के मुताबिक इसका एक कारण गुमशुदगी की शिकायतों को FIR के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया में आया बदलाव भी है। इसलिए इन मामलों को सीधे तौर पर एक ही दिन में 150 से अधिक अपहरण की घटनाएं मानना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी।