केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल धरना-प्रदर्शन और राजनीतिक आरोपों के सहारे चुनाव नहीं जीते जा सकते। यदि विपक्ष को सत्ता में वापसी करनी है, तो उसे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना होगा और जनकल्याण के लिए ठोस काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस की राजनीति को नकारात्मक बताते हुए दावा किया कि पार्टी अगले 30 वर्षों तक सत्ता में नहीं आ पाएगी।
अमित शाह गुरुवार को दिल्ली में यमुना पुनर्जीवन से जुड़ी परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड की 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाली 33 परियोजनाओं की शुरुआत की। कार्यक्रम के दौरान शाह ने चुनावी नतीजों पर सवाल उठाने, वोट चोरी के आरोपों और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी निशाना साधा।
वोट चोरी के आरोपों पर विपक्ष को घेरा
अमित शाह ने कहा कि भाजपा की जीत के बाद विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगता है और अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग तथा ईवीएम पर फोड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि केरल, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में विपक्षी दलों की जीत भी उसी चुनाव आयोग और ईवीएम व्यवस्था के तहत हुई है।
शाह के मुताबिक, विपक्ष अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि अदालतों के फैसले अपने पक्ष में आने पर विपक्ष उन्हें स्वीकार करता है, जबकि प्रतिकूल फैसलों पर संस्थाओं की आलोचना शुरू कर देता है।
राहुल गांधी का नाम लिए बिना साधा निशाना
अपने संबोधन में अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं को धरना-प्रदर्शन करने के बजाय जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। शाह ने विदेश यात्राओं का उल्लेख करते हुए भी विपक्षी नेतृत्व पर कटाक्ष किया और कहा कि राजनीतिक सफलता के लिए जनता के बीच रहना तथा उनकी जरूरतों को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के लंबे समय तक सत्ता में रहने की बात पर विपक्ष वोट चोरी के आरोप लगाने लगता है। शाह ने दोहराया कि कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रखेगी।
शाह के बयान की 5 बड़ी बातें
- जनता के बीच जाने की सलाह: शाह ने विपक्ष से कहा कि चुनाव जीतने के लिए लोगों की समस्याएं समझें और कल्याणकारी योजनाओं पर काम करें।
- वोट चोरी के आरोपों पर पलटवार: उन्होंने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग और ईवीएम को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
- विपक्ष की जीत का दिया उदाहरण: शाह ने केरल, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में विपक्षी दलों की जीत का हवाला देकर चुनावी व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों को चुनौती दी।
- कांग्रेस पर 30 साल तक सत्ता से बाहर रहने का दावा: शाह ने कांग्रेस की राजनीति को नकारात्मक बताते हुए कहा कि पार्टी अगले तीन दशक तक सरकार नहीं बना पाएगी।
- राहुल गांधी पर बिना नाम लिए निशाना: शाह ने विदेश यात्राओं और विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए विपक्षी नेतृत्व की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए।
SIR और वोट चोरी के विवाद की टाइमलाइन
23 सितंबर: चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर 10 महीने के दौरान 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के बाद विवाद बढ़ा। चुनाव आयोग ने कहा कि फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
6 अक्टूबर: INDIA ब्लॉक का चुनाव आयोग तक मार्च
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्षी सांसदों ने वोट चोरी तथा चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला। पुलिस ने मार्च रोका और कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
8 अक्टूबर: राजघाट पर मौन प्रदर्शन
राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA ब्लॉक के सांसदों ने राजघाट पर मौन प्रदर्शन किया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। अन्य शहरों में भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किए गए।
10 अक्टूबर: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया। पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर विवाद सामने आया। इस घटना से जुड़े हिरासत के आंकड़े और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
12 अक्टूबर: सुप्रीम कोर्ट तक मार्च
विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर याचिका दायर किए जाने की भी जानकारी दी गई।
अब आगे क्या?
अमित शाह के इस बयान से चुनावी पारदर्शिता, वोट चोरी के आरोपों और विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को लेकर भाजपा तथा विपक्ष के बीच जारी टकराव और तेज होने के संकेत हैं। भाजपा जहां विपक्ष के आरोपों को चुनावी हार से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।
नोट: इस खबर में दिए गए बयानों, घटनाओं की तारीखों और SIR विवाद से जुड़े विवरणों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड तथा मूल समाचार रिपोर्ट से सत्यापित कर लें।