छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद एक इंजीनियर से 78 लाख रुपए ठग लिए गए। ठगों ने खुद को डॉक्टर बताकर एक महंगे गिफ्ट और विदेशी करेंसी भेजने का झांसा दिया। बाद में कस्टम ड्यूटी, प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और अन्य चार्जेज के नाम पर उनसे यह मोटी रकम ऐंठ ली गई।
इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती, गिफ्ट का लालच
सरगुजा जिले के रामाज्ञा सिंह (51), जो कि मनेंद्रगढ़ वन विभाग में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं, ठगी के शिकार हुए। घटना की शुरुआत जून 2024 में हुई, जब रामाज्ञा की इंस्टाग्राम पर डॉ. मतिल्दा हैरिसन नाम की एक महिला से दोस्ती हुई। मतिल्दा ने खुद को यूनाइटेड किंगडम (यूके) की निवासी बताया और दोनों के बीच सामान्य बातचीत शुरू हो गई।
महंगे गिफ्ट का झांसा
कुछ दिनों बाद, मतिल्दा ने रामाज्ञा को बताया कि वह अपनी नौकरी के 6 साल पूरे होने की खुशी में उन्हें आईफोन-14, टी-शर्ट, परफ्यूम और विदेशी करेंसी समेत महंगे गिफ्ट भेज रही है। उसने रामाज्ञा से कहा कि गिफ्ट के डिलीवरी और प्रोसेसिंग फीस का भुगतान उन्हें करना होगा।
कॉल्स और व्हाट्सऐप पर ठगी का खेल
फर्जी कोरियर सर्विस का प्लान
कुछ दिन बाद, रामाज्ञा को दीपक शर्मा नाम के व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को कोरियर सर्विस मैनेजर बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर विदेशी गिफ्ट और करेंसी भेजे गए हैं।
दीपक ने गिफ्ट की डिलीवरी के लिए डिलीवरी चार्ज, कस्टम ड्यूटी, इंश्योरेंस फीस और अन्य टैक्स के नाम पर पैसे मांगने शुरू कर दिए।
कई किस्तों में पैसे जमा कराए
17 जुलाई 2024 से 29 अक्टूबर 2024 के बीच, रामाज्ञा ने अलग-अलग नामों से मांगे गए शुल्क के तहत कई बार पैसे जमा कराए।
- पहली किस्त: डिलीवरी चार्ज के रूप में ₹28,000।
- कस्टम ड्यूटी: ₹4,65,000।
- आर्म्स कंट्रोल यूनिट: ₹6,75,000।
- GST: ₹2,75,000।
- अन्य चार्जेस: लाखों रुपए।
गिफ्ट के लालच में 78 लाख गंवाए
ठगों ने रामाज्ञा को यह भरोसा दिलाया कि गिफ्ट की कुल कीमत ₹1.35 करोड़ है। इसके एवज में उन्होंने टैक्स और अन्य प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर पैसे जमा करने का दबाव बनाया। रामाज्ञा इस लालच में लगातार पैसे जमा करते रहे।
ठगी का एहसास कब हुआ?
जब ₹78,37,999 खर्च करने के बावजूद उन्हें कोई गिफ्ट नहीं मिला, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद रामाज्ञा ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, ठग गिरोह का शक
साइबर सेल पुलिस ने मामले में धारा 66डी, 3(5), और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस को शक है कि यह एक बड़े साइबर ठग गिरोह का काम है। सरगुजा संभाग में किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी की यह अब तक की सबसे बड़ी घटना मानी जा रही है।
पुलिस की चुनौती:
- ठगों की पहचान: पुलिस को अभी यह पता लगाना है कि ठग कौन हैं और कहां से काम कर रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय ठगी: ठगों ने खुद को विदेशी नागरिक बताया, जिससे यह मामला और पेचीदा हो गया है।
- फर्जी पहचान: ठगों ने मतिल्दा हैरिसन और दीपक शर्मा जैसे फर्जी नामों का इस्तेमाल किया।
ऑनलाइन ठगी का तरीका: जानिए कैसे बचें
यह घटना ऑनलाइन ठगों के खतरनाक तरीकों को उजागर करती है।
ठगी का मॉडल:
- सोशल मीडिया पर दोस्ती करना।
- गिफ्ट या पैसों का लालच देना।
- डिलीवरी, टैक्स और अन्य चार्जेस के नाम पर रकम ऐंठना।
कैसे बचें?
- संदिग्ध प्रोफाइल से सावधान रहें: सोशल मीडिया पर अजनबियों से दोस्ती करते समय सतर्क रहें।
- लालच से बचें: महंगे गिफ्ट या इनाम के झूठे वादों पर भरोसा न करें।
- पैसे ट्रांसफर करने से पहले सोचें: कोई भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने से पहले उसकी सच्चाई की पुष्टि करें।
- साइबर क्राइम हेल्पलाइन का इस्तेमाल करें: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।
ठगी के बाद का असर
आर्थिक नुकसान:
रामाज्ञा सिंह ने अपनी मेहनत की कमाई गंवा दी। 78 लाख रुपए की ठगी उनके परिवार के लिए आर्थिक संकट का कारण बन गई।
मानसिक तनाव:
इस तरह की घटनाएं पीड़ित और उनके परिवार पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती हैं।
ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामले
यह घटना अकेली नहीं है। हाल के वर्षों में ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं।
2023 की घटना:
- छत्तीसगढ़ में ही एक अन्य व्यक्ति को लॉटरी के नाम पर 50 लाख रुपए से अधिक की ठगी का शिकार बनाया गया था।
- गुजरात में एक महिला से शादी के झांसे में 30 लाख रुपए की ठगी हुई थी।
सरकार की पहल:
- साइबर क्राइम रोकने के लिए सरकार ने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया है।
- साइबर थानों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
सावधानी ही बचाव है
रामाज्ञा सिंह के साथ हुई यह घटना एक बड़ी सीख है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहना कितना जरूरी है। लालच में आकर कोई भी जल्दबाजी में फैसला न लें। ठगों का जाल दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन जागरूकता और सतर्कता से ऐसे मामलों से बचा जा सकता है।