निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की योजना के तहत शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत आरक्षित सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है कि इस बार आरक्षित सीटें खाली न रहें।
आरक्षित सीटों की जानकारी अपडेट करने के निर्देश
शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों से कहा है कि वे अपनी आरक्षित सीटों की जानकारी अपडेट करें।
- 31 जनवरी 2025 तक शिक्षा अधिकारी सभी स्कूलों के प्रोफाइल की सत्यापन प्रक्रिया पूरी करेंगे।
- इसके बाद, 1 फरवरी से 29 फरवरी के बीच स्कूलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही, स्कूलों में आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों की संख्या को भी अपडेट किया जाएगा।
1 मार्च से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया
शिक्षा सत्र 2025-26 में प्रवेश के लिए प्रक्रिया इस प्रकार रहेगी:
- 1 मार्च से 31 मार्च 2025: केजी-1 और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चों का पंजीकरण किया जाएगा।
- दस्तावेजों की जांच 17 मार्च से 25 अप्रैल तक होगी।
- 1 और 2 मई: को लॉटरी के माध्यम से सीटों का आवंटन किया जाएगा।
- 5 से 30 मई: तक चयनित बच्चों को संबंधित स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा।
दूसरे चरण की प्रक्रिया भी तैयार
यदि पहले चरण में सभी सीटें नहीं भरती हैं, तो खाली सीटों के लिए दूसरे चरण की प्रक्रिया चलाई जाएगी।
बीते साल खाली रह गई थीं हजारों सीटें
बीते साल आरटीई के तहत प्रदेशभर के 6,749 निजी स्कूलों में कुल 54,367 सीटें आरक्षित थीं।
- इनमें से केवल 46,219 सीटों पर ही दाखिला हुआ।
- 8,148 सीटें खाली रह गईं।
- रायपुर जिले के लगभग 800 स्कूलों में 6,000 सीटें आरक्षित थीं, जिनमें से 1,000 सीटें खाली रह गईं।
ज्यादा आवेदन के बावजूद सीटें क्यों खाली रहीं?
- इस बार 1,22,000 आवेदन प्राप्त हुए थे, जो सीटों की संख्या का लगभग दोगुना था।
- इसके बावजूद सीटें खाली रह गईं क्योंकि कई आवेदकों के दस्तावेजों में खामियां थीं या उन्होंने समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं की।
आरटीई के तहत बेटियों को विशेष प्राथमिकता
सरकार ने इस बार बेटियों को अधिक प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
- 50% सीटें बेटियों के लिए आरक्षित की गई हैं।
- यदि सीटें खाली रहती हैं, तो उन्हें बालकों के लिए खोल दिया जाएगा।
स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल
आरटीई की तर्ज पर स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी बेटियों को प्राथमिकता दी जा रही है।
शिक्षा विभाग ने शुरू किया प्रचार अभियान
इस बार आरटीई की सभी सीटों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने पहले से ही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
- अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि एक भी सीट खाली न रहे।
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रचार अभियान चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।
लॉटरी प्रणाली के फायदे और चुनौतियां
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें आरक्षित हैं, जिन पर लॉटरी के माध्यम से दाखिला दिया जाता है।
- फायदा:
- यह प्रणाली पारदर्शी और निष्पक्ष मानी जाती है।
- हर बच्चे को समान अवसर मिलता है।
- चुनौतियां:
- कई बार आवेदकों के दस्तावेज अधूरे रहते हैं।
- ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी होती है।
पिछले साल की समस्याओं से सीखा सबक
पिछले साल कई सीटें खाली रहने की मुख्य वजह यह थी कि:
- ग्रामीण इलाकों में योजना के बारे में जानकारी कम थी।
- ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में कई अभिभावक तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रहे थे।
- कुछ निजी स्कूल आरक्षित सीटों को भरने में रुचि नहीं दिखा रहे थे।
इस बार शिक्षा विभाग ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए:
- स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया।
- आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया।
- स्कूल प्रबंधन को आरक्षित सीटों की जानकारी अपडेट करने के सख्त निर्देश दिए।
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने जारी की परीक्षा समय सारिणी
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) ने दिसंबर-जनवरी 2024-25 के लिए नियमित सेमेस्टर परीक्षाओं की समय सारिणी जारी कर दी है।
- परीक्षार्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.prsu.ac.in पर टाइम टेबल देख सकते हैं।
- जारी समय सारिणी में एमए सिंधी, क्लासिक्स, एमएससी फॉरेंसिक साइंस, बी. वोकेशनल इंटीरियर डिजाइन, और जेम एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री प्रोफेशनल पाठ्यक्रम शामिल हैं।
जागरूकता और सहभागिता की जरूरत
शिक्षा का अधिकार कानून गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
- यह योजना तभी सफल हो सकती है, जब स्कूल, अभिभावक और प्रशासन मिलकर इसके प्रति गंभीरता दिखाएं।
- शिक्षा विभाग ने इस बार हर स्तर पर पूरी तैयारी की है, लेकिन जागरूकता की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
इस योजना से गरीब बच्चों को समान अवसर मिलने की उम्मीद है। यदि इस पर ईमानदारी से अमल किया जाए, तो यह प्रदेश के शिक्षा स्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।