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छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: 12 के मारे जाने की खबर, सर्च ऑपरेशन जारी…!

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गुरुवार को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर पुलिस और नक्सलियों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई। इस दौरान खबर है कि 12 नक्सली मारे गए हैं। हालांकि, अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ भी सकती है।

दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों से करीब 1500 जवानों ने इस अभियान में हिस्सा लिया है। जवानों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और शुक्रवार सुबह से सर्च ऑपरेशन जारी है।

 

 

मुठभेड़ का कारण और तैयारी

पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि पामेड़ इलाके में बड़ी संख्या में नक्सली छिपे हुए हैं। इस सूचना के आधार पर, तीन जिलों की सुरक्षा टीमों को वहां भेजा गया। टीम में डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), कोबरा बटालियन (205, 206, 208, और 210), और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के जवान शामिल थे।

सर्च ऑपरेशन की शुरुआत दो दिन पहले की गई थी, लेकिन गुरुवार सुबह माओवादियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। दिनभर रुक-रुककर गोलीबारी होती रही। देर शाम तक खबर आई कि जवानों ने 10 से 12 नक्सलियों को मार गिराया।

 

 

1500 जवानों का अभियान जारी

1500 से ज्यादा जवान अभी भी इलाके में मौजूद हैं और सर्च ऑपरेशन कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब जवान ऑपरेशन पूरा करके लौटेंगे, तभी सही जानकारी मिल पाएगी कि नक्सलियों को कितना नुकसान हुआ है।

नक्सली समूह और क्षेत्र

दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के जिस इलाके में मुठभेड़ हुई, वहां नक्सलियों के कई बड़े समूह सक्रिय हैं। इनमें बटालियन नंबर 1, कंपनी नंबर 9, और पामेड़ एरिया कमेटी के नक्सली शामिल हैं। इस क्षेत्र में नक्सलियों का प्रमुख नेता हिड़मा, जो कोर कमेटी (CC) का सदस्य है, सक्रिय माना जाता है।

 

 

 

IED विस्फोट में घायल जवान

गुरुवार को ही बीजापुर जिले के बासागुड़ा थाना क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में कोबरा बटालियन के दो जवान घायल हो गए।

जवान पुतकेल कैंप से सर्च ऑपरेशन के लिए निकले थे, तभी यह हादसा हुआ। नक्सलियों ने इलाके में पहले से ही IED बिछा रखी थी। विस्फोट में दोनों जवानों के पैर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

12 जनवरी को भी 5 नक्सली मारे गए थे

 

इससे पहले, 12 जनवरी को भी पुलिस ने बीजापुर के मद्देड़ इलाके में मुठभेड़ के दौरान 5 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें दो महिला नक्सली भी शामिल थीं।

इस कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से एसएलआर (SLR), राइफल, और अन्य हथियार बरामद किए थे। बीजापुर के एसपी जितेंद्र यादव ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की थी।

 

 

 

 

 

जंगल में लगातार अभियान

12 जनवरी की घटना के बाद से ही सुरक्षा बल लगातार जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। जवानों ने नेशनल पार्क एरिया कमेटी के माओवादियों को चारों तरफ से घेर रखा था। मुठभेड़ के दौरान जवानों ने कई हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की।

बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने जानकारी दी कि जवानों ने SLR राइफल, 12 बोर बंदूक, सिंगल शॉट बंदूक, BGL (बम ग्रेनेड लॉन्चर), और कई अन्य हथियार बरामद किए हैं।

नक्सलियों के खिलाफ सख्त कदम

हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है। लगातार ऑपरेशन चलाकर नक्सली समूहों को उनके ही इलाकों में घेरा जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित इलाकों को सुरक्षित बनाना और वहां विकास कार्यों को तेज करना है।

नक्सली इलाकों में चुनौती

नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान चलाना सुरक्षा बलों के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में जवानों को हर कदम पर सतर्क रहना पड़ता है।

इसके अलावा, नक्सली इलाके में IED और अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे जवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सरकार की रणनीति और भविष्य की योजना

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि जब तक नक्सलियों का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक इन इलाकों में शांति और विकास संभव नहीं है।

इसके तहत नक्सलियों के गढ़ों को निशाना बनाकर उन्हें कमजोर करने की रणनीति बनाई गई है।

स्थानीय लोगों की भूमिका

सरकार और सुरक्षा बलों का यह भी प्रयास है कि स्थानीय लोगों को नक्सलवाद के खिलाफ जागरूक किया जाए। उन्हें यह समझाया जा रहा है कि नक्सली उनकी समस्याओं का हल नहीं हैं, बल्कि विकास और शांति ही उनके लिए सही रास्ता है।

छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर हुई मुठभेड़ नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। हालांकि, सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही इस अभियान के सही परिणामों की जानकारी सामने आ पाएगी।

यह ऑपरेशन न केवल नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकार और सुरक्षा बल पूरी मजबूती के साथ मौजूद हैं।

 

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