छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों की सीमाओं पर तेलंगाना से सटे पुजारी कांकेर जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में 18 नक्सली मारे गए। इनमें नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और 50 लाख का इनामी दामोदर भी शामिल था। यह मुठभेड़ 16 जनवरी को हुई, जिसकी पुष्टि खुद नक्सल संगठन ने की है।
कैसे मिली सफलता
15 जनवरी को सुरक्षाबलों को गुप्त सूचना मिली थी कि जंगल में नक्सल कमांडर हिड़मा और बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा के साथ लगभग 250 नक्सली छिपे हुए हैं। इस इनपुट के बाद दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों की DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड), कोबरा बटालियन और CRPF के 1500 से 2000 जवानों ने संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया।
सुरक्षाबलों ने रातभर जंगल की घेराबंदी की और 16 जनवरी की सुबह करीब 8 बजे मुठभेड़ शुरू हुई। यह मुठभेड़ दिनभर रुक-रुककर 8-9 घंटे तक चली। अगले दिन जवानों ने सर्च ऑपरेशन चलाया और इलाके से 12 नक्सलियों के शव बरामद किए।
मारे गए प्रमुख नक्सली
नक्सल संगठन की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि इस मुठभेड़ में उनके 18 साथी मारे गए। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- दामोदर उर्फ बड़े चोखा राव: सेंट्रल कमेटी मेंबर, 50 लाख का इनामी
- PPCM हुंगी, देवे, जोगा, नरसिंहराव
- 5 महिला नक्सली, जिन पर कुल 59 लाख रुपए का इनाम था।
सुरक्षाबलों ने 12 शव बरामद किए, जबकि 6 शव नक्सल संगठन के लोग अपने साथ ले गए।
दामोदर: नक्सलियों का बड़ा नेता
दामोदर, जो दक्षिण बस्तर में नक्सल गतिविधियों का नेतृत्व करता था, तीन जिलों – दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा – के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय था। उसकी सुरक्षा के लिए हमेशा 8-10 गार्ड मौजूद रहते थे। दामोदर AK-47 और SLR जैसे अत्याधुनिक हथियार लेकर चलता था।
नक्सलियों का मजबूत नेटवर्क तोड़ा गया
मारे गए नक्सली बटालियन नंबर 1 के माओवादी थे, जिन्हें नक्सलियों की सबसे ताकतवर टीम माना जाता है। मुठभेड़ के दौरान जवानों ने नक्सलियों के हथियार और BGL लॉन्चर भी बरामद किए। इसके अलावा, तलाशी अभियान के दौरान सुकमा और बीजापुर की सीमा पर तलपेरू नदी के पास नक्सलियों का एक बंकर भी मिला।
इस बंकर में हथियार, विस्फोटक बनाने का सामान और अन्य जरूरी उपकरण मिले।
हिड़मा और देवा बच निकले
हालांकि, इस मुठभेड़ के दौरान नक्सली कमांडर हिड़मा और देवा भागने में सफल रहे। अफसरों का कहना है कि कई नक्सलियों को गोली लगी है और वे घायल हुए हैं।
सुरक्षाबलों की योजना और मुठभेड़ का विवरण
सुरक्षाबलों ने 15 जनवरी की रात को जंगल में पहुंचकर इलाके की घेराबंदी कर ली थी। 16 जनवरी की सुबह 8 बजे पहली मुठभेड़ हुई, जिसमें 2 नक्सली मारे गए। दिनभर रुक-रुककर फायरिंग चलती रही। रात होते ही जवान अपनी पोजीशन संभालकर बैठे रहे।
17 जनवरी को सुबह से फिर सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ। इसके तहत नक्सलियों के ठिकाने और बंकरों की तलाशी ली गई।
बस्तर IG का बयान
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि नक्सलियों के लिए यह एक बड़ी हार है। दामोदर और अन्य शीर्ष नेताओं की मौत से नक्सलियों को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने यह भी बताया कि नक्सलियों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने 18 कैडरों के मारे जाने की पुष्टि की है।
नक्सली गतिविधियों पर असर
दामोदर की मौत के बाद दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की ताकत कमजोर पड़ने की संभावना है। दामोदर नक्सल संगठन का एक प्रमुख रणनीतिकार था, जो न सिर्फ हमले की योजनाएं बनाता था, बल्कि संगठन की अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाता था।
सुरक्षाबलों की उपलब्धि
यह मुठभेड़ सुरक्षाबलों की एक बड़ी सफलता है। ऑपरेशन में शामिल जवानों की तैयारी और सही रणनीति के कारण नक्सलियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
भविष्य की योजनाएं
सुरक्षाबलों ने साफ किया है कि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज किया जाएगा। इलाके में शांति और विकास लाने के लिए जवान पूरी तत्परता से काम कर रहे हैं।
यह मुठभेड़ सुरक्षाबलों की प्रतिबद्धता और उनकी कड़ी मेहनत का नतीजा है। इससे यह साबित होता है कि सरकार और सुरक्षाबल मिलकर नक्सल समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं।