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मैत्रीबाग में आस्ट्रेलियन पक्षी का बढ़ेगा कुनबा : आदमकद ईमू ने दिए अंडे, देखते ही बनती है उसकी ममता की गरमाहट

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विमलशंकर झा- भिलाई । बीएसपी के मैत्रीबाग जू में आदमकद पक्षी ईमू बर्ड के परिवार में जल्द नया मेहमान आने वाला है। इसके लिए चिड़ियाघर में तैयारी शुरु हो गई है। ईमू मादा ने पांच अंडे दिए हैं। आस्ट्रेलिया के इस सुंदर राष्ट्रीय पक्षी के कुनबे को बढ़ता देखना मैत्रीबाग के लोगों के साथ सैलानियों के लिए भी एक सुखद और रोमांचकारी अनुभूति होगी। पखवाड़ेभर पूर्व अपने एनक्लोजर में मादा ईमू ने जिस ममत्व से अंडे दिए हैं, उतने ही जतन और सतर्कता से नर इन्हें से रहा है। उसके विशाल डैने के प्यार की गर्माहट देख मादा ईमू की बैचैनी और खुशी का ठिकाना नहीं है। वह चारों ओर फुदक फुदक कर अंडों की रक्षा कर रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक,  8 हफ्ते में अंडों से बच्चे बाहर निकलते हैं। अंडों को मादा की सजगता से नर सेता है। इस दौरान मां और पिता यानी ईमू जोड़ा अंडों की विषैले जीवों से रक्षा को लेकर बेहद सजग होते हैं। मैत्रीबाग के प्रभारी और डीजीएम डां. एनके जैन बताते हैं कि ईमू एक बार में 4 से 7 अंडे देती है। हमें अंडों से बच्चों के बाहर आने की प्रतीक्षा है और विभागीय कर्मियों द्वारा इनकी देखभाल और सुरक्षा की जा रही है। गौरतलब हो कि हवा, पानी, सर्प आदि कारणों के चलते अंडों से सुरक्षित बच्चों का निकलना एक बड़ी चुनौती होती है। पांच साल पूर्व भी ईमू ने 5 अंडे दिए थे, जिन्हें फर्टीलाइट टेस्ट के लिए वेटेनरी कालेज अंजोरा भेजा गया था, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। यूरोप के कुछ देशों में ईमू के अंडों में प्रोटीन विटामिन आदि पौष्टिक तत्वों की अधिकता के मिथक के चलते इस बेजुबां परिंदों के अस्तित्व पर संकट बड़ गया था। इसे देखते हुए आस्ट्रेलिया जैसे कुछ देशों ने संरक्षण के लिए कठोर कानून बनाए ।

खाने के लिए देते हैं पैडी 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 में जवाहरलाल नेहरु जू बोकारो से मैत्रीबाग लाए गए एक जोड़ा आस्ट्रेलियन पक्षी ईमू बर्ड एक विलुप्तप्राय प्रजाति है। चार फीट कद के यह नर और मादा की उम्र 19 वर्ष है। यह दुर्लभ परिंदा मध्यभारत में सिर्फ मैत्रीबाग में है। शुष्क वनों और घास वाले मैदानी इलाकों में पाया जाने वाला ईमू शाकाहारी व मांसाहारी दोनों होता है। मैत्रीबाग में इन्हें खाने के लिए ज्वार, बाजरा आदि चोखर (पैडी) दिए जाते हैं। ये कीड़े मकोड़े भी खाते हैं। डां. जैन बताते हैं कि इनकी औसत आयु तीस से चालीस साल होती और यह दुनिया कंगारु के बाद दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला बर्ड है। हमारे खूबसूरत मोर की तरह यह आस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पक्षी है। अन्य परिंदों की तरह यह उड़ नहीं सकता लेकिन 60 किलो वजन के बाद भी बेहत फुर्तीला और ताकतवर होने के साथ संवेदनशील भी होता है।

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