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जागरूकता की कमी: पिछले चार महीने से नहीं हुआ अंगदान, किडनी-लिवर के जरूरतमंदों की वेटिंग पहुंची 191 तक

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रायपुर। लगातार कोशिशों के बाद भी ब्रेनडेड होने वाले मरीजों के अंगदान करने के मामले में लोगों में पूरी तरह जागरूकता नहीं आ पाई है। अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं पिछले चार माह से प्रदेश में अंगदान के लिए कोई परिवार सामने नहीं आया है। अंतिम बार फरवरी की शुरुआत में सड़क हादसे में ब्रेनडेड आर्यंश नामक छात्र का अंगदान किया गया था। दूसरी ओर राज्य अंग एवं उतक प्राधिकरण के पास पेंडिंग आवेदनों की संख्या 191 हो गई है। इसमें किडनी के 165 जरूरतमंद और लिवर के 26 मरीज शामिल हैं।

अंगदान जीवनदान है… इस बात को लोगों को समझाने में राज्य अंग एवं उतक प्राधिकरण की टीम को बड़ी कामयाबी नहीं मिल पाई है। दो से तीन महीने में उनकी कड़ी मशक्कत के बाद ही कोई परिवार ब्रेनडेड हो चुके अपने परिवार के सदस्यों का अंगदान करने के लिए राजी होते हैं। प्रदेश में फरवरी में अंतिम अंगदान हुआ था, वहीं किडनी-लिवर प्राप्त करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सोटो कार्यालय के पास वर्तमान में अंगदान का इंतजार करने वालों के कुल 192 आवेदन लंबित हैं, जिसमें से 191 लोगों को किडनी लिवर मिलने का इंतजार है। इनमें 165 किडनी के जरूरतमंद हैं और 26 लिवर मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्य में अंग प्रत्यारोपण तथा ब्रेनडेड मरीजों से अंगदान में लेने की प्रक्रिया ढाई साल पहले शुरू हो चुकी है, मगर अब तक इसकी सुविधा राजधानी के अस्पतालों से आगे नहीं बढ़ सकी है। यहां शासकीय स्तर पर एम्स को छोड़कर प्रत्यारोपण की सुविधा केवल निजी अस्पतालों तक सीमित है।

कोई विकल्प नहीं होने पर आवेदन
ब्रेनडेड मरीजों से मिलने वाली किडनी तभी प्राप्त की जा सकती है, जब संबंधित मरीज के पास प्रत्यारोपण कराने के लिए कोई दूसरा विकल्प न हो। एक ब्रेनडेड मरीज की दो किडनी दो लोगों को जीवनदान देती है। इसी तरह नेत्र दो लोगों के जीवन में रोशनी लाते हैं और लिवर एक मरीज को नया जीवन देता है। ब्रेनडेड मरीज की त्वचा और हृदय के वॉल्व टिश्यू भी मरीजों के लिए संजीवनी का काम करते हैं।

हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी
राज्य के शासकीय अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा प्रस्तावित है। वहीं एम्स में लिवर प्रत्यारोपण के साथ हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी भी शुरू की जा चुकी है। इसके लिए चिकित्सकों को दूसरे राज्यों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जा चुका है। इसके अलावा मरीजों की सुविधा के लिए वहां अलग से ट्रांसप्लांट यूनिट भी तैयार की जा रही है।

अब तक प्रत्यारोपण

  1. 21 किडनी और 6 मरीजों को जिगर (लिवर) प्रत्यारोपित किया गया।
  2. 14 लोगों ने त्वचा दान की जिससे कास्मेटिक अथवा प्लास्टिक सर्जरी मददगार साबित हुई।
  3. 14 कार्निया के माध्य लोगों के जीवन का अंधकार खत्म हुआ।
  4. 5 दानदाताओं के हृदय के वाल्व से कई हृदय रोगियों की शल्यक्रिया में मदद मिली।

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