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आस्था की राह पर कड़े बंदोबस्त; 58 हजार जवान, हाईटेक निगरानी; इन बातों का रखें ध्यान…!!

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अमरनाथ यात्रा आरंभ हो गई है। गुरुवार (3 जुलाई) को बालटाल और नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप से तीर्थयात्रियों का पहला जत्था रवाना हुआ। श्रद्धालुओं ने ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम भोले’ के जयकारे लगाए। बाबा अमरनाथ की पहली आरती की गई। 38 दिन चलने वाली यात्रा पहलगाम और बालटाल दोनों रूटों से होगी। यात्रा का समापन 9 अगस्त को होगा। इस साल 3.5 लाख से ज्यादा तीर्थयात्री रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।

हमें आतंकवाद का डर नहीं
अमरनाथ यात्रियों के पहले जत्थे में शामिल एक तीर्थयात्री ने कहा-हम पहले जत्थे (पहलगाम से) में बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जा रहे हैं। हमें आतंकवाद का डर नहीं है और हम अमरनाथ यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे… सुविधाएं बेहतरीन हैं।

सभी की मनोकामनाएं पूरी हों
कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार बिधूड़ी ने कहा-यात्रा सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं है। इसमें सुरक्षा बल, पिट्ठू, टेंट, हर सेवा प्रदाता शामिल होता है… श्रद्धालुओं में उत्साह अद्वितीय होता है। मैं प्रार्थना करता हूं कि सभी की मनोकामनाएं पूरी हों और कश्मीर तथा देश के बाकी हिस्सों में शांति और खुशहाली बनी रहे।

उपराज्यपाल ने पहले जत्थे को किया था रवाना
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार (2 जुलाई) को 5,892 श्रद्धालुओं का पहला जत्था भगवती नगर कैंप से रवाना किया था। ये लोग दोपहर में कश्मीर पहुंचे। यहां पर प्रशासन और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया।

सबसे जरूरी बातें
यात्रा पर निकलने से पहले जरूरी दस्तावेज और सामान अपने साथ रखना जरूरी है। मेडिकल सर्टिफिकेट, चार पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड और ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म अपने साथ रखें। शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए रोजाना 4 से 5 किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास करें। साथ ही प्राणायाम जैसे श्वास संबंधी योग और हल्की एक्सरसाइज से शरीर को मजबूत बनाएं। साथ ले जाने वाले सामान में ऊनी कपड़े, रेनकोट, ट्रैकिंग स्टिक, पानी की बोतल और जरूरी दवाओं से भरा बैग जरूर रखें, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

दो रूट…आप किसे चुनेंगे

पहलगाम रूट…
भगवान शिव की पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए दो प्रमुख रास्ते हैं। पहला पहलगाम रूट है। इस रास्ते से गुफा तक पहुंचने में लगभग तीन दिन लगते हैं। पहलगाम से यात्रा शुरू होती है। पहला पड़ाव चंदनवाड़ी है। यहां से चढ़ाई शुरू होती है। 3 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद यात्री पिस्सू टॉप पहुंचते हैं। फिर यहां से 9 किमी चलने के बाद शेषनाग पहुंचते हैं। फिर 14 किमी का सफर करने के बाद यात्री पंचतरणी जाते हैं। पंचतरणी से गुफा सिर्फ 6 किमी रह जाती है।

बालटाल रूट: संकरा रास्ता, खड़ी चढ़ाई
बालटाल से दूसरा रास्ता शुरू होता है। यह मार्ग अपेक्षाकृत छोटा है। एकदम खड़ी चढ़ाई है।बालटाल से गुफा तक की दूरी केवल 14 किलोमीटर है। रास्ता अधिक सीधा और खड़ी चढ़ाई वाला है। बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर यात्रियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण है। इस रूट पर रास्ते संकरे होते हैं और तेज मोड़ होने की वजह से सावधानी जरूरी है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
जम्मू-कश्मीर सरकार’ ने यात्रा मार्ग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग को ‘नो फ्लाइंग जोन’ (No Flying Zone) घोषित किया है। दोनों रास्तों पर सभी हवाई उपकरण-ड्रोन, यूएवी और गुब्बारे प्रतिबंधित रहेंगे। हाईवे पर CRPF का K-9 दस्ता (डॉग स्क्वॉड) भी तैनात है। संवेदनशील इलाकों में चेहरा पहचानने के सिस्टम (FRS) के जरिए वैरिफिकेशन किया जाएगा। यह सर्विलांस कैमरे में किसी ब्लैकलिस्टेड व्यक्ति के दिखते ही सिक्योरिटी फोर्स को सूचित करेगा। काफिले की सुरक्षा के लिए पहली बार हाईवे पर जैमर लगाए गए हैं।

58 हजार सुरक्षाकर्मी रहेंगे तैनात
यात्रियों की सुरक्षा के लिए पहली बार जैमर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। निगरानी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) करेगी। यात्रा में 58,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। श्रद्धालुओं को कंधे पर बिठाकर ले जाने वाले पोनी वालों का वैरिफिकेशन होगा। जिनके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड होंगे। उन्हें सेवा की अनुमति नहीं दी जाएगी। घोड़े और खच्चरों की टैगिंग होगी ताकि यात्रा मार्ग से भटकने पर रियल टाइम में ट्रैक किए जा सकें।

इलाके में ड्रोन से निगरानी होगी
रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) रास्ते को सुरक्षित करेगी। क्विक एक्शन टीम (QAT) किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देगी। बम डिफ्यूज़ल स्क्वॉड को अलर्ट पर रखा गया है। K9 यूनिट्स (विशेष ट्रेनिंग पाए खोजी कुत्ते) भी सुरक्षा में लगाए जाएंगे। पूरे इलाके में ड्रोन के ज़रिए निगरानी की जाएगी।

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