जगदलपुर |
अब बरसात न नक्सल ऑपरेशन को रोक पाएगी, न जवानों की हिम्मत को डिगा पाएगी। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ ‘ऑपरेशन मानसून’ पूरे जोश और रणनीति के साथ शुरू हो चुका है। भारी बारिश, उफनते नदी-नाले और घने जंगलों के बीच फोर्स ने मोर्चा संभाल लिया है। जवान अब जंगलवार फेयर कॉलेज कांकेर, मिजोरम और आंध्रप्रदेश की स्पेशल फोर्स ग्रेहाउंड्स से कड़ी ट्रेनिंग लेकर नक्सलियों के गढ़ में घुसकर कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
5 साल में 99 हार्डकोर नक्सली ढेर – इस बार लक्ष्य और बड़ा
बीते पांच वर्षों में मानसून के दौरान 111 बार मुठभेड़ हुई, जिसमें 99 कुख्यात नक्सलियों को ढेर किया गया। इस दौरान 743 नक्सली गिरफ्तार और 920 ने समर्पण कर दिया। फोर्स ने 179 हथियार और 295 IED भी बरामद किए। लेकिन यह आंकड़े अभी और भी बढ़ने वाले हैं। इस बार फोर्स और रणनीति दोनों पहले से ज्यादा आक्रामक और सटीक हैं।
जवानों की तैयारी: बरसात नहीं, हौसला मायने रखता है
-
जवान अब खास तौर पर रिवर क्रॉसिंग किट, अस्थायी पुल, टेंट, रेपलिंग रस्सियां और स्पेशल मेडिकल किट के साथ सुसज्जित हैं।
-
जंगलों में जंगली जानवर, सांप-बिच्छू और मधुमक्खियों से मुकाबले के लिए भी स्पेशल मेडिकल ट्रेनिंग दी गई है।
-
जवान अब जंगल में कई दिनों तक डेरा डालकर बिना संपर्क टूटे अभियान चला सकते हैं।
️ स्पेशल ट्रेनिंग, नई रणनीति: नक्सली बैकफुट पर
इस बार बस्तर के जवानों को कांकेर के जंगलवार कैंप में प्राइमरी ट्रेनिंग के बाद मिजोरम की स्पेशल फोर्स और आंध्र प्रदेश की ग्रेहाउंड्स यूनिट के साथ जॉइंट ट्रेनिंग करवाई गई है। यह वह यूनिट है, जो देश में नक्सलवाद से लड़ने में सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। अब बस्तर के जवानों की रणनीति और जमीनी पकड़, दोनों और भी मजबूत हो गई हैं।
️ बरसात बनी चुनौती, लेकिन ऑपरेशन नहीं होगा धीमा
आईजी बस्तर सुंदरराज पी ने साफ कहा है:
“बरसात हमारे हौसले को नहीं रोक सकती। मुश्किलें जरूर हैं — कीचड़, तेज बहाव, संचार बाधाएं, जंगली खतरे — लेकिन हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है: बस्तर को नक्सलमुक्त बनाना और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना। हमारे जवान हर मोर्चे पर तैयार हैं।”
नक्सल आंदोलन की कमर टूटती नजर आ रही है
-
बढ़ती कार्रवाई के चलते माओवादियों का नेटवर्क सिमट रहा है।
-
नक्सलियों की रणनीति अब फोर्स के आगे फेल हो रही है।
-
कई इलाकों में नक्सल मूवमेंट पूरी तरह ठप हो चुका है।
✅ ग्राउंड रिपोर्ट का निष्कर्ष:
यह कोई साधारण ऑपरेशन नहीं है। यह साहस, समर्पण और रणनीति का ऐसा संगम है, जिसमें देश के सबसे दुर्गम इलाकों में जवानों की हिम्मत नक्सलियों की हिंसा से टकरा रही है। ऑपरेशन मानसून सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बस्तर में शांति और विकास की ओर बढ़ता हुआ निर्णायक कदम है।