दिल्ली की सड़कों पर हजारों आवारा गायें बेघर होकर भटक रही हैं।
कूड़े के ढेर से खाना ढूंढती ये गायें ट्रैफिक जाम का कारण भी बन रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल — दिल्ली नगर निगम (MCD) आखिर कर क्या रहा है?
20 साल से नई गौशाला नहीं बनी!
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1990 के दशक में दिल्ली में सिर्फ 6 गौशालाएं बनी थीं।
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उनमें से दो बंद हो चुकी हैं, एक तो शुरुआत में ही ठप हो गई थी।
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2018 में नजफगढ़ की अचार्य सुशील मुनि गौशाला भी खराब प्रबंधन और गायों की मौतों की वजह से बंद कर दी गई।
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आज हालत यह है कि 20,485 गायें गौशालाओं में ठूंसी गईं, जबकि क्षमता सिर्फ 19,838 की है!
नतीजा: गायों का सड़कों पर जमावड़ा
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गायें अब गली-मोहल्लों ही नहीं, बल्कि मुख्य सड़कों पर भी डेरा जमाए बैठी हैं।
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कई बार बीच सड़क पर बैठने से लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है।
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कभी-कभी लोग इन्हें हटाने के लिए लाठियां तक चला देते हैं।
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ये दृश्य दिल्ली की सड़क सुरक्षा और प्रशासन पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।
️ स्थानीय प्रतिनिधियों का बयान:
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नरेला जोन की प्रतिनिधि अंजू देवी ने कहा:
“गौशालाएं नई गायों को नहीं ले रही हैं। सरकार को नई गौशालाएं बनानी होंगी।
तब तक पड़ोसी राज्यों से मदद लेनी चाहिए।”
मीटिंग में भी उठा मुद्दा
20 अगस्त को MCD की स्थायी समिति की बैठक में भी गौशालाओं की बदहाली का मामला गूंजा।
अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि MCD इस समस्या का क्या हल निकालेगा —
या फिर गायें यूं ही दिल्ली की सड़कों पर ‘स्थायी निवासी’ बनी रहेंगी!