7 ग्राफिक्स में जानें कौन-से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित, 50% टैरिफ से निकलने का रास्ता क्या है
भारत हर साल दुनिया भर में करीब ₹38 लाख करोड़ का माल एक्सपोर्ट करता है। इसमें से 20% प्रोडक्ट्स अमेरिका को बेचे जाते हैं। अमेरिकी सरकार द्वारा 50% टैरिफ बढ़ाने का असर अब भारत के ₹4.22 लाख करोड़ के निर्यात पर पड़ सकता है।
तो सवाल है – भारत किन प्रोडक्ट्स के लिए अमेरिका पर सबसे ज्यादा निर्भर है और इससे बाहर निकलने के लिए हमारी रणनीति क्या होगी?
अमेरिका-निर्भर एक्सपोर्ट सेक्टर (7 ग्राफिक्स से समझें)
(यहां 7 ग्राफिक्स का विजुअल एनालिसिस होगा: टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, फार्मा, सीफूड, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो पार्ट्स और IT सर्विसेज)
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जेम्स और ज्वेलरी: सबसे ज्यादा निर्भरता – 45% एक्सपोर्ट अमेरिका जाता है।
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सीफूड: अमेरिकी बाजार पर 30% निर्भरता, खासकर झींगा (Shrimp) एक्सपोर्ट।
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टेक्सटाइल और गारमेंट: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा मार्केट, 35% शेयर।
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फार्मा सेक्टर: 40% जेनेरिक दवाओं का निर्यात अमेरिका।
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ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स: अमेरिका प्रमुख ग्राहक।
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IT सर्विसेज: अमेरिका से भारत को अरबों डॉलर का सर्विस एक्सपोर्ट।
टैरिफ का असर – बड़ा झटका या मौका?
50% टैरिफ से अमेरिकी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ जाएगी, जिससे मांग घट सकती है।
भारतीय निर्यातकों को नए बाजार खोजने होंगे, नहीं तो 4.22 लाख करोड़ रुपए तक का नुकसान हो सकता है।
यह संकट भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग को विविध करने का भी अवसर है।
भारत की नई रणनीति: अमेरिका पर निर्भरता कम करने का प्लान
1️⃣ 50 देशों के लिए नई निर्यात पॉलिसी:
सरकार का फोकस अब चीन, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप जैसे बाजारों पर होगा।
2️⃣ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA):
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लागू: आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड (1 अक्टूबर से लागू)
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अगले साल: ब्रिटेन के साथ डील (अप्रैल से)
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बातचीत जारी: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ, ओमान, चिली, पेरू
3️⃣ इंडस्ट्री-आधारित बाजार टारगेटिंग:
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सीफूड: रूस, UK, नॉर्वे, दक्षिण कोरिया
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जेम्स-ज्वेलरी: वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, अफ्रीका
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फार्मा और टेक्सटाइल: यूरोपीय यूनियन और मिडिल ईस्ट
निष्कर्ष
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, लेकिन अब समय है डायवर्सिफिकेशन का।
नए FTAs और इंडस्ट्री-स्पेसिफिक मार्केट स्ट्रेटजी के जरिए भारत इस चुनौती को अवसर में बदल सकता है।
निर्यातकों के लिए यह सही समय है नए ग्राहक देशों पर इन्वेस्टमेंट बढ़ाने का।
“क्राइसिस ही इनोवेशन की जननी है” – यह टैरिफ संकट भारत को नए ट्रेड मैप पर अग्रणी बना सकता है।