मोदी-जिनपिंग 31 अगस्त को तियानजिन में आमने-सामने:

Spread the love

एक साल में दूसरी मुलाकात, 7 साल बाद चीन यात्रा करेंगे भारतीय प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित मुलाकात 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाली SCO समिट के दौरान होगी।
यह मुलाकात कई मायनों में अहम है — मोदी सात साल बाद चीन जा रहे हैं और यह दोनों नेताओं की पिछले 12 महीनों में दूसरी द्विपक्षीय बातचीत होगी।


पिछली मुलाकात का बैकड्रॉप

अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी-जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई थी। तब प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संदेश दिया था:

“सीमा पर शांति और स्थिरता हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता ही रिश्तों की नींव हैं।”

उस बैठक के बाद दोनों देशों ने सीमा विवाद को संवाद के जरिए सुलझाने पर सहमति जताई थी।


SCO समिट 2025: क्या खास रहेगा

तारीख़: 31 अगस्त-1 सितंबर
स्थान: तियानजिन, चीन
शामिल देश: 20+ सदस्य और पर्यवेक्षक राष्ट्र
मुख्य एजेंडा: क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, व्यापारिक साझेदारी और ऊर्जा सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मध्य एशिया के कई देशों के नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।


भारत-चीन रिश्तों में हालिया कूटनीतिक एक्टिविटी

पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बीजिंग जाकर जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी।
मुलाकात में:

  • जल संसाधन डेटा शेयरिंग पर चर्चा

  • व्यापार प्रतिबंध हटाने की मांग

  • LAC पर तनाव घटाने की रणनीति

  • आतंकवाद और उग्रवाद पर कड़ा रुख अपनाने की सहमति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दौरा पीएम मोदी की यात्रा का रोडमैप तैयार करने वाला टर्निंग पॉइंट था।


अमेरिका-रूस समीकरणों के बीच भारत-चीन मुलाकात का महत्व

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।

  • यह कदम भारत के रूसी तेल और हथियार खरीद पर दबाव डालने के लिए उठाया गया।

  • भारत रूस से रोज़ाना 17.8 लाख बैरल क्रूड ऑयल आयात करता है, जिससे वह चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रूसी तेल खरीदार बन गया है।

ऐसे समय में यह मोदी-जिनपिंग वार्ता भारत के लिए एक अहम कूटनीतिक संतुलन साधने का मौका है।


ऐतिहासिक संदर्भ: 2019 की महाबलीपुरम मीटिंग

शी जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। महाबलीपुरम में हुई यह अनौपचारिक शिखर वार्ता दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने का प्रयास थी।
दोनों नेताओं ने उस समय भी सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया था।


SCO क्या है और क्यों है अहम

शंघाई सहयोग संगठन (SCO):

  • स्थापना: 2001

  • संस्थापक सदस्य: चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान

  • भारत-पाकिस्तान: 2017 में सदस्य बने

  • ईरान: 2023 में जुड़ा

  • उद्देश्य: क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी, आतंकवाद विरोध और साइबर सुरक्षा पर सहयोग


निष्कर्ष

मोदी-जिनपिंग की यह मुलाकात केवल भारत-चीन रिश्तों के लिए ही नहीं, बल्कि बदलते अमेरिका-रूस समीकरणों और वैश्विक व्यापार संकट के संदर्भ में भी अहम है।
7 साल बाद पीएम मोदी का चीन दौरा भारत की एशियाई कूटनीति में नए मोर्चे खोलने का संकेत दे सकता है।


“तियानजिन में होने वाली यह मुलाकात सिर्फ एक समिट नहीं, बल्कि एशिया की भू-राजनीति को नया आकार देने वाली बातचीत हो सकती है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *