गेमिंग बिल पर बवाल: A23 ने हाईकोर्ट में दी चुनौती, कहा- स्किल गेम्स पर बैन गलत

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ऑनलाइन गेमिंग कंपनी A23 ने रियल-मनी गेमिंग पर ऑल-आउट बैन लगाने वाले नए कानून के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। याचिका पर सुनवाई 30 अगस्त को होगी। कंपनी का कहना है कि रमी, पोकर जैसे स्किल-बेस्ड गेम्स को बैन करना संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।


⚖️ A23 का तर्क

  • यह कानून व्यापार करने के मौलिक अधिकार का हनन करता है।

  • स्किल-बेस्ड और चांस-बेस्ड गेम्स में फर्क नहीं किया गया।

  • बैन से लाखों नौकरियां और गेमिंग इंडस्ट्री पर खतरा।

  • खिलाड़ी अवैध ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स की ओर जाएंगे।


ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025: मुख्य प्रावधान

  1. रियल-मनी गेम्स पर पूरी तरह बैन: ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी।

  2. सजा और जुर्माना:

    • गेम ऑफर/प्रचार करने पर 3 साल जेल, ₹1 करोड़ जुर्माना

    • विज्ञापन चलाने वालों पर 2 साल जेल, ₹50 लाख जुर्माना

  3. रेगुलेटरी अथॉरिटी: सभी गेम्स को रजिस्टर करेगी और मनी-बेस्ड गेम्स की पहचान करेगी।

  4. ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: PUBG, Free Fire जैसे नॉन-मनी गेम्स को प्रमोट किया जाएगा।


गेमिंग इंडस्ट्री पर असर

  • Dream11, Games24x7, Gameskraft, PokerBaazi जैसी कंपनियों ने कैश गेम्स बंद किए।

  • मार्केट साइज: ₹32,000 करोड़ (86% रेवेन्यू मनी गेम्स से)।

  • अनुमानित नुकसान: ₹20,000 करोड़ टैक्स, 2 लाख नौकरियां खतरे में।


सरकार का पक्ष

  • रियल-मनी गेमिंग से मानसिक और आर्थिक संकट।

  • 45 करोड़ लोग प्रभावित, ₹20,000 करोड़ का नुकसान मिडिल-क्लास फैमिलीज़ को।

  • मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी खतरे की आशंका।

  • WHO ने गेमिंग को डिसऑर्डर के रूप में मान्यता दी।


अब सवाल यह है कि क्या कोर्ट स्किल गेम्स को राहत देगा या सरकार का सख्त कानून कायम रहेगा।

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