8 सितंबर, 2025 को ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की ओर से बुलाए गए BRICS नेताओं के वर्चुअल समिट में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री मोदी की जगह विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दी।
समिट में अमेरिका के टैरिफ हटाने के उपाय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। ब्राजील इसे अमेरिका विरोधी सम्मेलन के रूप में नहीं पेश कर रहा।
अमेरिका ने भारत पर शर्त रखी थी
अमेरिका के उद्योग मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने कहा कि भारत को अगर 25% अतिरिक्त टैरिफ हटवाना है, तो उसे तीन शर्तें माननी होंगी:
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रूस से तेल खरीद बंद करना।
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BRICS से अलग होना।
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अमेरिका का समर्थन करना।
लुटनिक ने कहा कि भारत रूस और चीन के बीच ब्रिज बनना चाहे तो बन सकता है, लेकिन उसे डॉलर और अमेरिका के पक्ष में रुख रखना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत जल्द ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत में शामिल होगा।
भारत क्यों BRICS में बना हुआ है
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रूस और चीन के साथ निकटता: भारत की BRICS में मौजूदगी रूस और चीन के प्रभाव को बढ़ाती है।
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रूसी तेल खरीद: यूक्रेन संकट के बाद भारत ने सस्ता तेल रूस से खरीदा, जो अब देश की आवश्यकताओं का 40% है।
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टैरिफ की धमकी: अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है।
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डी-डॉलराइजेशन का डर: BRICS के माध्यम से डॉलर पर निर्भरता कम होने की संभावना।
भारत का रुख स्पष्ट है: BRICS वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बढ़ाने का मंच है, न कि अमेरिका विरोधी।
2026 में भारत की BRICS अध्यक्षता
भारत 1 जनवरी 2026 से BRICS का अध्यक्ष बनेगा और 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य:
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मानवता पहले (Humanity First): लोगों के हितों को प्राथमिकता देना।
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लचीलापन और नवाचार (Resilience & Innovation): नई तकनीक और सहयोग को बढ़ावा।
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सतत विकास (Sustainability): जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य पर ध्यान।
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ग्लोबल साउथ की आवाज़: विकासशील देशों के हितों को मजबूत करना।
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आतंकवाद विरोधी और आर्थिक मजबूती: सहयोग और सुरक्षा बढ़ाना।
पिछला BRICS अनुभव
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17वां BRICS समिट 6-7 जुलाई, 2025 को ब्राजील, रियो डी जनेरियो में हुआ।
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मोदी ने इसमें हिस्सा लिया और कहा कि ग्लोबल साउथ अक्सर डबल स्टैंडर्ड का शिकार रहा है।
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समिट में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब के नेता शामिल हुए।
BRICS का मकसद और इतिहास
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BRICS की शुरुआत BRIC के रूप में 4 देशों—ब्राजील, रूस, भारत और चीन—से हुई।
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इसका उद्देश्य पश्चिमी देशों के दबदबे को कम करना और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करना।
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बाद में इसमें दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों को शामिल किया गया।
निष्कर्ष: भारत BRICS में अपनी स्थिर उपस्थिति बनाए रखना चाहता है, लेकिन अमेरिका के साथ संतुलन भी बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। 2026 में अध्यक्षता से पहले यह रणनीतिक कदम माना जा रहा है।