पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को दिल्ली रवाना होते वक्त एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में सरकार को कई मुद्दों पर घेरा।
संपत्ति कर नोटिस पर सवाल
बघेल ने कहा कि निगम की ओर से भेजा गया संपत्ति कर नोटिस सिर्फ उन्हें ही थमाया गया है, जबकि सरकारी आवासों में कई नेता और अधिकारी रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया – “उन्हें नोटिस क्यों नहीं दिया गया?”
नक्सल मुद्दे पर दोहरी बात
हाल ही में हुई नक्सल मुठभेड़ पर उन्होंने जवानों की बहादुरी की सराहना की। लेकिन साथ ही कहा कि नक्सलवाद खत्म होना चाहिए, मगर इस प्रक्रिया में निर्दोष गरीब आदिवासी न मारे जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार बेगुनाहों को नक्सली बताकर मार दिया जाता है।
धान खरीदी और किसानों की परेशानी
बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार धान खरीदना ही नहीं चाहती। पिछले साल खरीदा गया धान अब भी राइस मिलों तक नहीं पहुंचा और संग्रहण केंद्रों में पड़ा है।
सितंबर–अक्टूबर में नई फसल आने वाली है, जिससे खरीदी और प्रभावित होगी।
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किसानों को खाद की कमी
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बिजली कटौती
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पंजीयन की अव्यवस्था
उन्होंने कहा कि जिन किसानों की जमीन दो गाँवों में है, उनका पंजीयन अधूरा है। ऐसे में किसान धान कहां बेचेंगे? स्थिति बेहद गंभीर है और जल्द अफरा-तफरी मच सकती है।
कानून व्यवस्था पर तंज
बघेल ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था बिखरी हुई है। हर शहर में हत्या, लूट, बलात्कार और नशे का कारोबार बढ़ रहा है। विधानसभा अध्यक्ष तक मान रहे हैं कि नशा कारोबार फल-फूल रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सिर्फ एक टीआई पर कार्रवाई की है, वह भी तीन हत्याओं के बाद। रायपुर और बड़े शहरों में लगातार चाकूबाजी की वारदात हो रही हैं। उनका आरोप है कि सूखे नशे का धंधा तेज़ी से बढ़ा है और सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
विजय शर्मा को सीधा सवाल
गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा SIR की मांग पर पलटवार करते हुए बघेल ने कहा कि यह काम निर्वाचन आयोग का है, जनता का नहीं।
उन्होंने सवाल किया – “विजय शर्मा बताएं कि प्रदेश में कितने पाकिस्तानी नागरिक रह रहे हैं और अब तक कितनों को वापस भेजा गया?”
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को महीनों बीत गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस आंकड़ा सामने नहीं आया।
नेपाल की घटना पर चेतावनी
बघेल ने पड़ोसी देशों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत की इंटेलिजेंस पूरी तरह राहुल गांधी पर नजर गड़ाए हुए है, लेकिन नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी जगहों की घटनाओं पर ध्यान नहीं है।
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श्रीलंका में लोग राष्ट्रपति भवन में घुस गए और सत्ता पलट गई।
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बांग्लादेश में राष्ट्रपति को भागना पड़ा और निष्पक्ष व्यक्ति को जिम्मेदारी मिली।
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नेपाल में हालिया घटनाओं ने तो लोकतंत्र की नींव को हिला दिया – संसद ठप, न्यायपालिका प्रभावित, नेताओं पर हमले, एयरपोर्ट जलाए गए और मीडिया पर हमला।
बघेल ने कहा – “लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है। अगर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ मीडिया पर भी हमला हो, तो यह पूरे लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरनाक है। यह सिर्फ नेपाल के लिए नहीं, बल्कि सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए अलार्मिंग है।”
यानी भूपेश बघेल ने एक ही दिन में संपत्ति कर से लेकर किसानों, कानून व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय हालात तक सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा।