मिस्र की धरती पर दुनिया ने वह पल देखा, जिसका इंतज़ार लाखों निर्दोषों को था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान कर दिया – “गाजा में युद्ध अब समाप्त हो गया है।”
यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है।
दो साल तक चले खूनी संघर्ष में गाजा खंडहर बन चुका था। 67 हज़ार से ज्यादा फिलिस्तीनी जान गंवा चुके थे, जबकि इजराइल ने भी 1,200 नागरिक खोए। अब आखिरकार 20 बिंदुओं वाला शांति समझौता लागू हो गया है, जिसकी नींव मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता से रखी गई।
ट्रंप ने नेतन्याहू और हमास, दोनों पर दबाव डालकर इस डील को संभव किया। समझौते के मुताबिक—
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हमास सभी बंधकों को रिहा करेगा।
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गाजा प्रशासन अब अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के हाथों में होगा, हमास शासन से बाहर होगा।
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शांति बोर्ड का गठन होगा, जिसकी अध्यक्षता खुद ट्रंप करेंगे।
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गाजा के पुनर्निर्माण की अगुवाई ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से लेकर मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और ब्रिटेन के पीएम स्टारमर तक—दुनिया के बड़े नेता इस सम्मेलन में शामिल होंगे। भारत की ओर से कीर्ति वर्धन सिंह प्रतिनिधित्व करेंगे।
ट्रंप ने साफ कहा—“पहली बार गाजा और इजराइल, दोनों के लोग जश्न मना रहे हैं। यह इतिहास का सबसे अहम पल है।”
अब राहत सामग्री गाजा पहुंच चुकी है—भोजन, दवाइयां और तंबुओं से भरे ट्रक ज़रूरतमंदों को नई उम्मीद दे रहे हैं। आने वाले महीनों में गाजा के खंडहर फिर से बसेंगे और लोग सामान्य जिंदगी जी सकेंगे।