Zoho Mail: अब 12 लाख सरकारी कर्मचारियों का ईमेल सिस्टम संभालेगी Zoho, NIC की जगह नया डिजिटल बदलाव

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भारत सरकार ने अपने डिजिटल ढांचे में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग 12 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के ईमेल प्लेटफॉर्म को NIC (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) से हटाकर Zoho Corporation को सौंप दिया है। तमिलनाडु की इस भारतीय टेक कंपनी को यह जिम्मेदारी 7 साल के कॉन्ट्रैक्ट के तहत दी गई है।


स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

3 अक्टूबर को शिक्षा मंत्रालय ने सभी विभागों को Zoho Suite अपनाने के निर्देश जारी किए। इस फैसले का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाना और ईमेल सेवाओं में विदेशी या ओपन-सोर्स टूल्स की जगह सुरक्षित स्वदेशी समाधान को प्राथमिकता देना है।


डेटा सुरक्षा पर खास जोर

  • सरकार ने इस बदलाव से पहले NIC और CERT-In से सलाह ली।

  • ईमेल सिस्टम की सुरक्षा जांच Software Quality Systems (SQS) के माध्यम से नियमित रूप से होती रहेगी।

  • पूर्व IAS अधिकारी के.बी.एस. सिद्धू ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि डेटा सुरक्षा को “लीक-प्रूफ” बनाना बेहद ज़रूरी है और इसके लिए नियमित ऑडिट व एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन आवश्यक है।


NIC से Zoho तक सफर

  • 1976 में स्थापित NIC अब तक सरकारी ईमेल सेवाओं का मुख्य स्तंभ था।

  • अब Zoho संचालन तो करेगा, लेकिन सरकारी ईमेल आईडी अभी भी nic.in और gov.in डोमेन पर ही चलेंगी।

Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने साफ कहा है कि उनकी कंपनी का बिज़नेस मॉडल पूरी तरह “ट्रस्ट” (भरोसे) पर आधारित है। कंपनी यूज़र डेटा को कभी भी मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल नहीं करती और सभी ऐप्स में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन लागू कर रही है।


साइबर अटैक के बाद बड़ा फैसला

  • नवंबर 2022 में AIIMS दिल्ली पर साइबर अटैक के बाद सरकार ने अपने डिजिटल ढांचे की गहन समीक्षा की थी।

  • इसके बाद फरवरी 2023 में Digital India Corporation ने सुरक्षित क्लाउड सेवा के लिए बोली मंगाई।

  • मूल्यांकन के बाद Zoho Corporation को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।


कुल मिलाकर, यह बदलाव डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ी छलांग है। अब भारत सरकार का ईमेल सिस्टम ज़्यादा सुरक्षित, स्वदेशी और भरोसेमंद तकनीक के हवाले होगा।

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