WHO की चेतावनी: भारत में 3 कफ सिरप बच्चों की जान के लिए खतरा, Coldrif से 25 मासूमों की मौत

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत में बने तीन कफ सिरप को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। इनमें श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स की Coldrif, रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स की Respifresh TR और शेप फार्मा की Relife शामिल हैं। WHO का कहना है कि ये सिरप मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं और इनका इस्तेमाल जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।


Coldrif से मध्य प्रदेश में 25 बच्चों की मौत

  • मध्य प्रदेश में सितंबर से अब तक 5 साल से कम उम्र के 25 बच्चों की मौत Coldrif सिरप के कारण हुई।

  • जांच में पाया गया कि इस सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मात्रा तय सीमा से करीब 500 गुना ज्यादा थी।

  • DEG और एथिलीन ग्लाइकॉल दोनों ही किडनी फेलियर जैसे गंभीर असर डालने वाले जहरीले केमिकल हैं।


WHO और भारत सरकार की कार्रवाई

  • WHO ने 9 अक्टूबर को भारत से पूछा था कि क्या Coldrif सिरप विदेशों में भी निर्यात हुआ।

  • भारत की ड्रग रेगुलेटरी बॉडी CDSCO ने जवाब दिया कि इसका कोई अवैध निर्यात नहीं हुआ।

  • तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा की यूनिट से Coldrif के सैंपल जब्त किए गए।


कंपनी बंद, मालिक गिरफ्तार

  • श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और कंपनी को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

  • कंपनी के मालिक रंगनाथन गोविंदन (75) को 9 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया।

  • वह वर्तमान में 20 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर हैं।


जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

  • जब्त बैच (SR-13) में पाया गया कि इसमें 48.6% DEG मौजूद था।

  • Coldrif बनाने में नॉन-फार्माकॉपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल किया गया था।

  • फैक्ट्री महज 2000 वर्ग फीट के लोहे के शेड में चल रही थी और कई सालों से ड्रग सेफ्टी नियमों का उल्लंघन कर रही थी।


केंद्र सरकार की एडवाइजरी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 3 अक्टूबर को सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया।

  • 2 साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप न देने की अपील की गई।

  • 5 साल से कम उम्र के बच्चों को भी कफ सिरप से बचाने की सलाह दी गई है।

  • बड़े बच्चों में इसका इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह और सावधानी के साथ ही करने की बात कही गई है।


WHO की यह चेतावनी भारत के दवा उद्योग के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। यह मामला साफ दिखाता है कि क्वालिटी कंट्रोल और सख्त निगरानी के बिना बच्चों की ज़िंदगी खतरे में पड़ सकती है।


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