भारत और पाकिस्तान के बीच खेल की दुनिया में हमेशा जबरदस्त प्रतिस्पर्धा रहती है। क्रिकेट हो या हॉकी, दोनों देशों का मुकाबला सिर्फ खेल नहीं बल्कि भावनाओं का टकराव भी बन जाता है। लेकिन मंगलवार को मलेशिया में खेले गए सुल्तान ऑफ जोहोर कप जूनियर हॉकी टूर्नामेंट में नजारा बिल्कुल अलग रहा।
मैच और माहौल
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भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला रोमांचक रहा और 3-3 की बराबरी पर खत्म हुआ।
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मैच से पहले राष्ट्रीय गान के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ हाई-फाइव किया।
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मैच के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे से हाथ मिलाते और सम्मान जताते दिखे।
यह दृश्य खास इसलिए था क्योंकि कुछ हफ्ते पहले एशिया कप क्रिकेट के दौरान ऐसा माहौल देखने को नहीं मिला था।
क्रिकेट में दूरी, हॉकी में नजदीकी
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एशिया कप क्रिकेट में भारतीय टीम ने पाकिस्तान से हाथ मिलाने से परहेज किया था।
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यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले के शहीद परिवारों के सम्मान में लिया गया था।
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फाइनल जीतने के बाद भी भारतीय खिलाड़ियों ने पीसीबी प्रमुख और पाक गृह मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था।
इससे साफ था कि मैदान के बाहर की राजनीतिक-राजनयिक तनाव ने क्रिकेट मैदान पर भी असर डाला।
सूर्यकुमार यादव का जवाब
क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव से जब पूछा गया कि क्या भविष्य में भी पाकिस्तान से हाथ नहीं मिलाने की नीति जारी रहेगी, तो उन्होंने संतुलित बयान दिया।
उन्होंने कहा – “अभी कहना मुश्किल है, दिल्ली अभी दूर है। हम पाकिस्तान से सिर्फ मल्टीनेशन टूर्नामेंट में खेलते हैं। जब अगली बार मौका आएगा, तब देखा जाएगा। फिलहाल हम इस जीत और इस पल का आनंद ले रहे हैं।”
हॉकी से मिला संदेश
हॉकी टूर्नामेंट में हालांकि तस्वीर अलग थी।
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पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन (PHF) ने अपने खिलाड़ियों को पहले ही हिदायत दी थी कि किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से बचें।
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उन्हें कहा गया था कि अगर भारतीय खिलाड़ी हाथ नहीं बढ़ाएं, तो इसे नजरअंदाज कर सिर्फ खेल पर ध्यान दें।
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लेकिन मैदान पर माहौल सकारात्मक रहा और दोनों टीमों के खिलाड़ी सौहार्द और सम्मान दिखाते नजर आए।
नतीजा सिर्फ स्कोर का नहीं
भारत और पाकिस्तान का यह हॉकी मैच सिर्फ 3-3 की बराबरी नहीं था, बल्कि यह खेल भावना और आपसी सम्मान का प्रतीक बन गया। जहां क्रिकेट में राजनीतिक परिस्थितियों का असर दिखा, वहीं हॉकी में खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि खेल सीमाओं से ऊपर उठकर दोस्ती और भाईचारे का संदेश भी दे सकता है।
कह सकते हैं कि इस बार हॉकी मैदान ने दोनों देशों को एक पल के लिए करीब ला दिया और खेल के असली मकसद – स्पोर्ट्समैनशिप और सम्मान – को दुनिया के सामने पेश किया।