सोना तो हमेशा चमकता है, लेकिन इस बार असली चौंकाने वाली बात है चांदी का धमाका। पिछले 10 महीनों में चांदी की कीमतें लगभग 100% बढ़कर ₹86,000 से ₹1.75 लाख प्रति किलो पहुंच गई हैं। यह अब तक का सबसे तेज़ उछाल माना जा रहा है।
इस दौरान सोना भी बढ़ा, लेकिन चांदी ने उससे कहीं ज्यादा रिटर्न दिया—करीब 36% ज़्यादा। अब सवाल यह है कि—
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आखिर चांदी इतनी तेज़ क्यों भाग रही है?
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क्या अभी खरीदना समझदारी है?
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चांदी में निवेश के कौन-कौन से सुरक्षित रास्ते हैं?
चांदी की कीमतें इतनी क्यों बढ़ीं?
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त्योहारी डिमांड: भारत दुनिया का सबसे बड़ा चांदी उपभोक्ता है। दशहरे से दिवाली और धनतेरस तक चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
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इंडस्ट्रियल डिमांड:
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सौर ऊर्जा (सोलर पैनल्स)
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इलेक्ट्रिक व्हीकल्स
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टेक्नोलॉजी
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इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स
इन सभी में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
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कम सप्लाई: खदानें बंद होने और पर्यावरण नियमों की वजह से खनन घटा है।
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70% चांदी तांबे और जस्ता की माइनिंग के दौरान “बाय-प्रोडक्ट” के रूप में मिलती है।
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जब तक इन धातुओं का उत्पादन नहीं बढ़ता, चांदी की सप्लाई नहीं बढ़ेगी।
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मांग और सप्लाई में भारी अंतर → यही वजह है कि चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं।
क्या अभी चांदी खरीदना सही है?
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शॉर्ट टर्म में सावधानी: एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी पहले ही 100% चढ़ चुकी है, इसलिए आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए।
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लॉन्ग टर्म में फायदा: केडिया कमोडिटी के अजय केडिया के मुताबिक, आने वाले सालों में चांदी सोने से भी ज्यादा तेज़ रिटर्न दे सकती है।
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यानी— धीरे-धीरे निवेश करें, एकदम से बड़ी रकम न लगाएँ।
चांदी में निवेश करने के तरीके
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फिजिकल सिल्वर (Silver Coins/Bars)
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सबसे सीधा तरीका।
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केवल BIS हॉलमार्क वाली चांदी खरीदें।
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बैंकों, ज्वेलर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिलती है।
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रिस्क: चोरी और स्टोरेज।
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सिल्वर ईटीएफ (Silver ETFs)
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शेयरों की तरह ट्रेड होने वाला फंड।
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इसकी वैल्यू सीधे चांदी की कीमत से जुड़ी होती है।
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कोई स्टोरेज रिस्क नहीं, डीमैट अकाउंट चाहिए।
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सिल्वर फ्यूचर्स (Silver Futures)
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मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर ट्रेड होता है।
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आप भविष्य की किसी तारीख को तय कीमत पर खरीद-बिक्री का कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं।
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कम मार्जिन लगाकर बड़ा सौदा, लेकिन जोखिम बहुत ज्यादा।
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निष्कर्ष
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चांदी की कीमतों में आई उछाल ने इसे निवेशकों की नई पसंद बना दिया है।
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फेस्टिव सीजन में खरीदारी शुभ भी मानी जाती है और लंबी अवधि में फायदे का सौदा भी साबित हो सकती है।
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लेकिन इस समय भाव ऊँचे हैं, इसलिए धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश करें।