चेन्नई से बड़ी खबर — मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) सरकार राज्य में हिंदी भाषा पर पाबंदी लगाने के लिए विधानसभा में नया बिल पेश कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित बिल के तहत तमिलनाडु में—
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हिंदी फिल्में,
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हिंदी गाने,
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और हिंदी होर्डिंग्स-बोर्ड्स ❌ पूरी तरह बैन कर दिए जाएंगे।
⚡ CM स्टालिन का ‘भाषाई राष्ट्रवाद’
यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। दरअसल, स्टालिन लंबे समय से केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगाते रहे हैं।
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इसी साल मार्च में उन्होंने राज्य बजट के दस्तावेज से रुपए का ‘₹’ सिंबल हटाकर तमिल अक्षर ‘ரூ’ (रुबाई) जोड़ दिया था।
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उनका कहना है कि दो-भाषा नीति (तमिल + अंग्रेजी) ही राज्य के युवाओं को शिक्षा, कौशल और नौकरी में फायदा देती है।
️ कानूनी तैयारी और विधानसभा सत्र
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सरकार ने मंगलवार रात कानूनी विशेषज्ञों के साथ इमरजेंसी मीटिंग बुलाई।
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विधानसभा का विशेष सत्र 14 से 17 अक्टूबर तक चल रहा है, जिसमें यह बिल और अनुपूरक बजट पेश हो सकता है।
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी बनाम DMK
केंद्र की तीन-भाषा नीति (Three Language Formula) कहती है कि छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी होंगी— स्थानीय भाषा, हिंदी (राष्ट्रीय भाषा) और अंग्रेजी या विदेशी भाषा।
लेकिन स्टालिन साफ कह चुके हैं कि तमिलनाडु में यह लागू नहीं होगा।
उनका दावा है कि हिंदी थोपने से पिछले 100 सालों में 25 भारतीय भाषाएं खत्म हो गईं।
स्टालिन का बड़ा बयान
“हिंदी ने भोजपुरी, मैथिली, अवधी, ब्रज, बुंदेली, गढ़वाली, कुमाऊंनी, मगही, मारवाड़ी, छत्तीसगढ़ी और कई भाषाओं को निगल लिया है।
हिंदी एक मुखौटा है, जिसके पीछे संस्कृत छुपा हुआ चेहरा है।” — एमके स्टालिन
राजनीति में नया टकराव?
अगर बिल पास होता है तो—
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हिंदी कंटेंट पर बैन से फिल्म इंडस्ट्री और विज्ञापन जगत को बड़ा झटका लगेगा।
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केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच भाषाई टकराव और तेज हो सकता है।
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वहीं, DMK इसे ‘ड्रविड़ अस्मिता’ और ‘राज्य की पहचान बचाने’ की लड़ाई बताकर जनता को लामबंद करेगी।
सवाल यही है कि क्या तमिलनाडु की यह लड़ाई सिर्फ हिंदी बनाम तमिल है या फिर यह केंद्र और राज्यों के बीच संविधानिक अधिकारों की बड़ी जंग बनने जा रही है?