सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी स्कूलों की लापरवाही को फिर उजागर कर दिया है। वीडियो में छोटे-छोटे मासूम बच्चे, जिनके हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे क्लासरूम में पोछा लगाते और कचरा उठाते दिख रहे हैं।
घटना डेरापहाड़ी स्कूल की
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यह मामला मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले का है।
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घटना शनिवार की बताई जा रही है।
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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह स्कूल कलेक्टर बंगले से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर स्थित है।
सोशल मीडिया पर उठा आक्रोश
वीडियो सामने आते ही लोग प्रशासन से सवाल पूछ रहे हैं:
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“क्या बच्चों के हाथों में किताब की जगह झाड़ू और पोंछा होना चाहिए?”
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कई यूजर्स ने लिखा कि शिक्षा विभाग की ऐसी लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।
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लोग मांग कर रहे हैं कि दोषी जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाए।
छतरपुर में पहले भी दिख चुकी है लापरवाही
यह कोई पहली बार नहीं है जब सरकारी स्कूल चर्चा में आया हो।
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कुछ दिन पहले मरगुवा माध्यमिक विद्यालय में क्लास के अंदर एक टीचर बेंच पर गहरी नींद में सोते हुए पकड़ा गया था।
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उस समय भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे।
❓ अब उठ रहे बड़े सवाल
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क्या सरकारी स्कूलों में बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है?
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कलेक्टर बंगले से चंद कदम दूर स्थित स्कूल में अगर ऐसा हो रहा है, तो बाकी जिलों का हाल कैसा होगा?
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क्या शिक्षा विभाग बच्चों के हक की पढ़ाई छीन रहा है?
यह वीडियो सिर्फ छतरपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।