बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे महागठबंधन (RJD–कांग्रेस–VIP और अन्य सहयोगी दल) के भीतर सीट बंटवारे पर टकराव गहराता जा रहा है। कई जगहों पर कांग्रेस और वीआईपी ने एक ही सीट पर उम्मीदवार उतार दिए, तो कुछ सीटों पर आरजेडी और कांग्रेस आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।
इसी तनाव को सुलझाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पटना पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि वे तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव से मुलाकात कर मसले का समाधान निकालेंगे।
️ गहलोत का बयान – “5-10 सीटों पर विवाद कोई बड़ी बात नहीं”
पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अशोक गहलोत ने कहा –
“बिहार में कुल 243 सीटें हैं। इतने बड़े गठबंधन में अगर 5-10 सीटों पर मतभेद हैं, तो यह कोई बड़ी बात नहीं। किसी भी अलायंस में ऐसे मतभेद होना स्वाभाविक है।”
उन्होंने आगे कहा कि अधिकांश सीटों पर सहमति बन चुकी है और शेष भ्रम एक-दो दिन में दूर हो जाएगा। गहलोत ने यह भी साफ किया कि कुछ नेताओं ने उत्साह में नामांकन कर दिया, लेकिन यह गंभीर विवाद नहीं है।
तेजस्वी यादव का दावा – “गठबंधन पूरी तरह मज़बूत”
तेजस्वी यादव ने भी बयान देते हुए कहा –
“महागठबंधन में सीटों को लेकर कोई बड़ा विवाद नहीं है। कल तक सब कुछ साफ हो जाएगा।”
आज अशोक गहलोत और तेजस्वी यादव की बैठक होने वाली है, जिसमें सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर आखिरी बातचीत होगी। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कल सीट बंटवारे का ऐलान हो सकता है।
पप्पू यादव का बड़ा बयान – “राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ें चुनाव”
सीएम फेस को लेकर चल रही अटकलों के बीच पप्पू यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा –
“बिहार में दलित हो या सवर्ण, सभी राहुल गांधी के संघर्ष पर भरोसा करते हैं। एनडीए में मुख्यमंत्री का चेहरा नीतीश कुमार नहीं है, और महागठबंधन को भी किसी चेहरे पर निर्भर नहीं होना चाहिए। चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में लड़ना चाहिए।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि महागठबंधन में एकता बनाए रखना ही चुनावी जीत की कुंजी होगी।
अब निगाहें कल की घोषणा पर
गहलोत की पहल के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि सीट बंटवारे का फार्मूला अब लगभग तय हो चुका है।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो गुरुवार को आरजेडी और कांग्रेस की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीटों और चुनावी रणनीति का आधिकारिक ऐलान हो जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अशोक गहलोत की मध्यस्थता महागठबंधन में दरार को भर पाएगी, या फिर सीट बंटवारे का यह विवाद चुनाव तक चलता रहेगा?