रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements – REE) अब सिर्फ खनिज नहीं रहे। ये 21वीं सदी की रणनीतिक ताकत बन चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन से लेकर रक्षा उपकरण और अंतरिक्ष तकनीक तक, हर जगह इनकी अहमियत है। यही वजह है कि दुनिया की महाशक्तियां—चीन और अमेरिका—इन पर वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही हैं।
भारत भी इस दौड़ में तेजी से कदम बढ़ा रहा है और आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
क्यों हैं रेयर अर्थ इतने अहम?
रेयर अर्थ एलिमेंट्स 17 तरह की धातुएं होती हैं, जिनका इस्तेमाल इन क्षेत्रों में होता है:
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इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs) – मोटर और बैटरी टेक्नोलॉजी में
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ग्रीन एनर्जी – पवन टरबाइन और सोलर पैनल्स में
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रक्षा और अंतरिक्ष – मिसाइल, रडार, सैटेलाइट और जेट इंजन में
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टेक्नोलॉजी गैजेट्स – स्मार्टफोन, कंप्यूटर और मेडिकल डिवाइस तक
इन धातुओं के बिना आधुनिक दुनिया की तकनीकी प्रगति अधूरी है।
चीन की पकड़
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दुनिया के 60-65% रेयर अर्थ उत्पादन पर चीन का कब्ज़ा है।
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रिफाइनिंग यानी प्रोसेसिंग क्षमता में चीन का वर्चस्व और भी बड़ा है—करीब 85%।
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चीन कई बार इन धातुओं की सप्लाई को “स्ट्रेटेजिक वेपन” की तरह इस्तेमाल कर चुका है।
अमेरिका की रणनीति
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चीन की मोनोपॉली तोड़ने के लिए अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ समझौते किए हैं।
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अमेरिका खुद की माइनिंग क्षमता बढ़ा रहा है, लेकिन प्रोसेसिंग अभी भी बड़ी चुनौती है।
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डिफेंस और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को ध्यान में रखते हुए अमेरिका सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन पर काम कर रहा है।
भारत का बढ़ता कदम
भारत के पास भी रेयर अर्थ के बड़े भंडार हैं।
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राष्ट्रीय खनिज मिशन (National Mineral Mission) के जरिए भारत इन संसाधनों के दोहन की रणनीति बना रहा है।
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ओडिशा, आंध्र प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में रेयर अर्थ की खोज तेज की जा रही है।
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भारत-अमेरिका और भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी के जरिए भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए यह सिर्फ आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक ताकत हासिल करने का भी जरिया है।
भविष्य की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में रेयर अर्थ तेल और गैस से भी ज्यादा अहम हो जाएंगे।
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जो देश इन पर नियंत्रण रखेगा, वही टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र का नेतृत्व करेगा।
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भारत अगर समय रहते इन संसाधनों का सही उपयोग करे, तो वह चीन के दबदबे को चुनौती दे सकता है और अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार बन सकता है।
साफ है कि रेयर अर्थ की जंग सिर्फ खनिजों की नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीक, ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा की जंग है।