बॉलीवुड की दुनिया में कई सितारे आते-जाते रहते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में छपे रहते हैं। ऐसा ही एक नाम था गोवर्धन असरानी, जिन्हें दर्शक सिर्फ ‘असरानी’ कहकर याद करते हैं। अपनी मासूम मुस्कान, बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अनोखे अंदाज़ से उन्होंने भारतीय सिनेमा को वो किरदार दिए, जिन्हें भुलाना नामुमकिन है।
जयपुर से मायानगरी तक
असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर के एक सिंधी परिवार में हुआ था। उनका करियर रेडियो से शुरू हुआ, जब उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो पर वॉयस आर्टिस्ट के रूप में काम किया।
बाद में निर्देशक ऋत्विक घटक की प्रेरणा से वे मुंबई पहुंचे और FTII पुणे से 1966 में अभिनय की पढ़ाई पूरी की।
‘गुड्डी’ से मिली पहचान
असरानी ने शुरुआती दौर में कई फिल्मों में छोटे रोल किए। लेकिन 1971 में आई जया भादुरी स्टारर फिल्म ‘गुड्डी’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
इसके बाद वे ‘गोलमाल’, ‘बावर्ची’, ‘अभिमान’, ‘चुपके चुपके’ जैसी हिट फिल्मों में अपनी कॉमिक टाइमिंग से छा गए।
फिल्म ‘शोले’ के जेलर का उनका रोल आज भी पॉप कल्चर का हिस्सा है।
फिल्मों से टीवी और थिएटर तक
असरानी ने खुद को सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं किया। उन्होंने टीवी शोज़, स्टेज प्ले और गुजराती-साउथ इंडियन फिल्मों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उम्र बढ़ने और तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने काम से दूरी नहीं बनाई।
असरानी की संपत्ति
लगभग 60 साल लंबे करियर में असरानी ने 400 से ज्यादा फिल्मों और कई टीवी शोज़ व विज्ञापनों में काम किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी कुल नेट वर्थ ₹40 से ₹45 करोड़ के बीच थी।
अंतिम सफर
20 अक्टूबर 2025 को असरानी ने मुंबई के जुहू आरोग्य निधि अस्पताल में आखिरी सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे असरानी का निधन दिवाली के दिन हुआ। देशभर में दीप जल रहे थे और उसी बीच हिंदी सिनेमा का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए बुझ गया।
यादों में असरानी
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6 दशक का करियर
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400+ फिल्में
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हिंदी के साथ-साथ गुजराती और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय
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हमेशा दर्शकों को हंसाने वाले यादगार किरदार
असरानी की कॉमिक टाइमिंग और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा याद की जाएगी। वे सिर्फ एक एक्टर नहीं, बल्कि एक संस्था थे, जिसने भारतीय सिनेमा को अनगिनत मुस्कानें दीं।