रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस बार धान की खेती पर किसानों को जेब ढीली करनी पड़ी है। प्रति एकड़ लागत औसतन 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच रही है। इसमें खेत तैयार करने से लेकर फसल कटाई तक का पूरा खर्च शामिल है।
खेती के तरीके के आधार पर लागत अलग-अलग आती है। उदाहरण के लिए—
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खेत की जुताई और तैयारी पर: 2–3 हजार रुपये
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बीज, खाद, कीटनाशक और रोपाई पर: 20–25 हजार रुपये
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कटाई में: 2–3 हजार रुपये
अगर फसल पर मौसम या बीमारी का असर पड़ जाए, तो कीटनाशक पर और करीब 3 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
कटाई और बिक्री में देरी से बढ़ता बोझ
धान की कटाई के बाद खरीदी केंद्रों में बेचने तक किसानों को अक्सर इंतजार करना पड़ता है। यह अंतराल कभी 15 दिन तो कभी पूरा महीना हो जाता है। इस दौरान धान को सुरक्षित रखने और नमी कम करने पर किसानों का 3–5 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाता है। आमतौर पर 1 से 15 नवंबर के बीच खरीदी प्रक्रिया शुरू होती है।
किसानों को मिल रहा दोगुना दाम
प्रदेश सरकार किसानों से प्रति एकड़ औसतन 21 क्विंटल धान खरीदती है।
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समर्थन मूल्य: ₹3100 प्रति क्विंटल
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कुल भुगतान: ₹65,100 प्रति एकड़
यानि लगभग 35 हजार रुपये की लागत के मुकाबले किसान को करीब दोगुनी रकम मिलती है। भुगतान सोसायटियों के माध्यम से सीधे खाते में किया जाता है।
उत्पादन का औसत
राज्य में किसान अलग-अलग किस्में बोते हैं—अर्ली वैरायटी से लेकर मोटा और पतला धान तक।
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अर्ली वैरायटी जुलाई से अक्टूबर के बीच तैयार हो जाती है।
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औसतन उत्पादन: प्रति एकड़ 25 क्विंटल तक।
अधिकांश जिलों में किसान मोटा धान लगाकर सोसायटियों को बेचते हैं।
खर्च का सारांश (प्रति एकड़)
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खेत तैयार करने में: ₹2–3 हजार
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बीज, खाद, कीटनाशक, रोपाई: ₹20–25 हजार
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कटाई: ₹2–3 हजार
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अतिरिक्त खर्च (बीमारी/मौसम): ₹3 हजार तक
यानी, छत्तीसगढ़ के किसानों पर धान की खेती में खर्च भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन सरकारी खरीदी और समर्थन मूल्य की वजह से उन्हें अब भी लागत से लगभग दोगुना लाभ मिल रहा है।