साल 2000 में आई ऋतिक रोशन और प्रीति जिंटा की फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ ने सिनेमाघरों में जबरदस्त सफलता पाई थी। लेकिन इसके पीछे की असली कहानी काफी रोमांचक है। फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा ने बाद में बताया था कि अगर यह फिल्म फ्लॉप हो जाती, तो उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ जाता।
पिछली फिल्म की वजह से डूबे कर्ज में
इससे पहले उनकी फिल्म ‘करीब’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट चुकी थी। इसकी वजह से वे करीब 1 करोड़ रुपए के कर्ज में डूब गए थे। ऐसे में मिशन कश्मीर उनके लिए करियर की सबसे बड़ी बाज़ी थी।
ऋतिक को मिली हीरोइन से कम फीस
सुकेतु मेहता की किताब ‘मैक्सिमम सिटी’ (2004) के अनुसार फिल्म के कॉन्ट्रैक्ट बेहद दिलचस्प थे।
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ऋतिक रोशन की फीस 11 लाख तय की गई थी।
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अगर फिल्म फ्लॉप होती तो उन्हें सिर्फ 1 लाख रुपए मिलते।
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फिल्म हिट होने पर उन्हें 10 लाख रुपए बोनस अलग से मिलता।
वहीं, प्रीति जिंटा की बेस फीस 15 लाख रखी गई थी।
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फिल्म चलने पर 10 लाख और जुड़ते।
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असफल होने पर उनकी रकम भी घटकर सिर्फ 1 लाख रह जाती।
संजय दत्त का सबसे बड़ा रिस्क
संजय दत्त का कॉन्ट्रैक्ट और भी रिस्की था।
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उन्हें 25 लाख रुपए तभी मिलते जब फिल्म लागत निकाल लेती।
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अगर फिल्म पिट जाती, तो उन्हें एक पैसा भी नहीं मिलता।
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सफलता पर उन्हें 25 लाख रुपए का बोनस और दिया जाता।
पहले शाहरुख और अमिताभ को मिला था ऑफर
दिलचस्प बात ये है कि फिल्म में अल्ताफ का किरदार पहले शाहरुख खान को और इनायत खान की भूमिका अमिताभ बच्चन को ऑफर की गई थी। लेकिन दोनों ने उसी समय ‘मोहब्बतें’ साइन कर ली, इसलिए ये फिल्म छोड़ दी। बाद में यह रोल ऋतिक रोशन और संजय दत्त को मिला।
‘कहो ना प्यार है’ से बदल गए समीकरण
शूटिंग के दौरान ही ऋतिक की डेब्यू फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ रिलीज हुई, जिसने धमाकेदार कमाई की। रातों-रात ऋतिक सुपरस्टार बन गए। इस वजह से मिशन कश्मीर के कॉन्ट्रैक्ट में भी बदलाव करने पड़े, क्योंकि अब ऋतिक का नाम बॉक्स ऑफिस पर गारंटी बन चुका था।
37 करोड़ की कमाई और खत्म हुआ कर्ज
रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘मिशन कश्मीर’ ने दुनियाभर में करीब 37 करोड़ रुपए का बिज़नेस किया। इस सफलता से न सिर्फ फिल्म हिट साबित हुई, बल्कि विधु विनोद चोपड़ा का कर्ज भी पूरी तरह उतर गया।