नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि शिक्षा और रोजगार से जुड़ी बड़ी घोषणा की है। उन्होंने सोमवार को दिल्ली के पूसा में आयोजित राष्ट्रीय कृषि छात्र सम्मेलन में कहा कि देशभर के कृषि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लंबे समय से खाली पड़े शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को अब जल्द ही भरा जाएगा।
छात्रों की चिंता, सरकार का एक्शन
चौहान ने कहा कि रिक्त पदों की वजह से कृषि छात्रों की पढ़ाई और रिसर्च प्रभावित हो रही है। इसको लेकर उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक को निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्यों के स्तर पर भी कृषि संस्थानों में खाली पद जल्द भरे जाएंगे। इसके लिए वे सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखेंगे और कृषि मंत्रियों से सीधी बातचीत करेंगे। चौहान ने साफ कहा –
“कृषि छात्रों के भविष्य से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा।”
नई शिक्षा नीति के अनुरूप सुधार
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत कृषि शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में तेज़ी से काम किया जाएगा। इसके लिए ICAR को तीन बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं –
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कृषि विद्यार्थियों की टीम बनाकर उनके सुझाव लेना।
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विश्वविद्यालयों की ग्रेडिंग प्रणाली लागू करना ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े।
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दुनिया के सफल कृषि प्रयोगों का अध्ययन कर उन्हें भारत में लागू करना।
व्यावहारिक अनुभव पर ज़ोर
चौहान ने छात्रों से संवाद में कहा कि हर कृषि छात्र को साल में कम से कम एक बार किसानों के खेत पर जाना चाहिए।
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इससे उन्हें ग्राउंड लेवल पर प्रैक्टिकल नॉलेज मिलेगा।
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वे किसानों की समस्याओं को समझ पाएंगे और नए समाधान सुझा सकेंगे।
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इससे ग्रामीण पलायन कम होगा और खेती में नवाचार (Innovation) को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का विज़न
चौहान ने अंत में कहा –
“विकसित भारत का सपना खेती के बिना अधूरा है। युवा कृषि वैज्ञानिक हमारी रीढ़ हैं और सरकार हर कदम पर किसान के साथ खड़ी है।”
यह सम्मेलन कृषि शिक्षा सुधार और सरकारी नौकरियों के नए अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।