जगदलपुर में मंगलवार की सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने इंसानियत को झकझोर दिया। मेडिकल कॉलेज डिमरापाल के पास स्थित माता रुक्मिणी आश्रम के पीछे झाड़ियों में एक नवजात बच्ची को जन्म के तुरंत बाद ही फेंक दिया गया।
रोने की आवाज़ बनी जिंदगी का सहारा
ग्रामीणों ने बताया कि वे रोज़ की तरह मवेशी चराने जंगल की तरफ गए थे। तभी झाड़ियों से आई नन्हीं जान की चीख ने उनके कदम रोक दिए। पास जाकर देखा तो एक मासूम बच्ची खून और मिट्टी में लिपटी हुई पड़ी थी। इंसानियत का फर्ज़ निभाते हुए ग्रामीणों ने उसे उठाया, कपड़े में लपेटा और तुरंत पुलिस को खबर दी।
बच्ची का वजन सिर्फ 600 ग्राम
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को मेकाज अस्पताल (जगदलपुर मेडिकल कॉलेज) में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची का वजन करीब 600 ग्राम है और उसकी हालत नाजुक है। फिलहाल डॉक्टरों की एक टीम उसकी देखभाल में जुटी है।
पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बच्ची को झाड़ियों में छोड़ने वाली मां या परिजन कौन हैं, इसकी तलाश शुरू कर दी गई है। आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और लोगों से पूछताछ की जा रही है।
सवालों के घेरे में ममता
नौ महीने तक गर्भ में पालने के बाद कोई मां अपने कलेजे के टुकड़े को इस तरह झाड़ियों में क्यों फेंक देती है? यह सवाल हर किसी को बेचैन कर रहा है। जहां एक ओर लोग बच्ची को गोद में लेने के लिए आगे आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने समाज के सामने एक कड़वा सच उजागर कर दिया है।
यह घटना न सिर्फ कानून और समाज के लिए चुनौती है, बल्कि मानवता की कसौटी पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।