चक्रवात मोन्था अब आंध्र प्रदेश से गुजरते हुए ओडिशा की ओर बढ़ चुका है। इसका असर आंध्र, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक दिख रहा है। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
आंध्र प्रदेश में तबाही का मंजर
मंगलवार शाम को चक्रवात ने काकीनाडा तट से टकराकर भारी तबाही मचाई। तेज़ हवाओं के साथ गिरते पेड़ और बिजली के खंभों ने कई इलाकों में जनजीवन ठप कर दिया।
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कई जगहों पर कार और ऑटो पर बड़े पेड़ गिर पड़े।
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बिजली सप्लाई घंटों बाधित रही।
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कच्चे मकान और झोपड़ियां ढह गईं।
ओडिशा में यात्रियों की नींद टूटी
चक्रवात का असर ओडिशा में भी साफ दिखा। रेलवे ट्रैक पर पानी भरने और तेज़ हवाओं के कारण कई ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। यात्रियों को मजबूरन स्टेशन पर ही पूरी रात गुजारनी पड़ी।
चार राज्यों पर संकट
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आंध्र प्रदेश: गोदावरी, कृष्णा और काकीनाडा जिलों में सबसे ज्यादा असर।
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ओडिशा: समुद्र तटीय इलाकों में अलर्ट, 2000 से ज्यादा राहत कैंप बनाए गए।
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तमिलनाडु और बंगाल: कई जिलों में भारी बारिश और तेज़ हवाओं का असर।
सरकार और NDRF की तैनाती
मोन्था के असर से निपटने के लिए NDRF की टीमें राहत-बचाव में लगी हुई हैं। पेड़ों और खंभों को हटाने का काम जारी है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे घरों से बाहर न निकलें और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करें।
यह चक्रवात भले कमजोर हुआ है, लेकिन तबाही के निशान छोड़ गया है। आम लोगों के लिए अगले 24 घंटे अभी भी चुनौती भरे हैं।
चक्रवात तूफान के असर की 11 तस्वीरें…
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