भारत ने मेरीटाइम सेक्टर (Maritime Sector) में हरित और स्थायी ऊर्जा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। मुंबई में देश का पहला बैटरी-आधारित मालवाहक जहाज (Battery Cargo Ship) तैयार हो रहा है, जिसे वर्ष 2026 तक समुद्र में उतार दिया जाएगा। यह जहाज करीब 2000 टन माल ढोने की क्षमता रखेगा और पूरी तरह देश में निर्मित होगा।
केंद्र सरकार की पहल से हरा-भरा समुद्री सफर
केंद्रीय पोत परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जानकारी दी कि इस जहाज को डीजल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड तकनीक पर तैयार किया जाएगा।
-
डीजल इंजन से बिजली बनेगी।
-
यह बिजली बैटरियों में स्टोर होगी।
-
वही बैटरी जहाज को गति देगी।
इससे ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण में भारी कमी आएगी। यह पहली बार है जब भारत बड़े स्तर पर इस तकनीक को कार्गो जहाज में लागू करने जा रहा है।
एसएसआर मरीन कर रहा निर्माण
इस जहाज को एसएसआर मरीन प्राइवेट लिमिटेड बना रही है। कंपनी के डायरेक्टर (ऑपरेशन) संजीव के. अग्रवाल ने कहा —
-
यह जहाज देश की तकनीकी प्रगति का प्रतीक होगा।
-
इससे 20% तक ईंधन की बचत होगी।
-
रक्षा क्षेत्र में भी इसका उपयोग संभव होगा।
क्यों है यह प्रोजेक्ट खास?
-
भारत के लिए यह समुद्री क्षेत्र की ग्रीन टेक्नोलॉजी में ऐतिहासिक छलांग है।
-
इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।
-
विश्व स्तर पर भारत यह संदेश देगा कि वह क्लीन एनर्जी और सतत विकास की दिशा में अग्रणी है।
आने वाले समय में ऐसे और बैटरी-आधारित जहाज बन सकते हैं, जो न सिर्फ व्यापार बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी उपयोगी साबित होंगे।